भोपाल। 
मध्यप्रदेश में नवरात्रि उत्सव शुरू होने से पहले ही राजनीति गरमा गई है. गरबा जैसे सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर नेताओं के बीच हिंदू-मुस्लिम विवाद पर जुबानी जंग छिड़ गई है. बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल अपने-अपने बयानों से माहौल को गर्म बनाए हुए हैं. एक ओर सत्ता पक्ष के नेता गरबा को "सांस्कृतिक अस्मिता" से जोड़ रहे हैं, वहीं विपक्षी नेता इसे "धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति" करार दे रहे हैं. कुल मिलाकर, नवरात्रि शुरू होने से पहले ही गरबा आयोजनों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी ने माहौल को गरमा दिया है. जहां बीजेपी नेताओं ने गैर-हिंदुओं की एंट्री और लव जिहाद को मुद्दा बनाया है, वहीं कांग्रेस नेताओं ने भी अपनी राय रखी है. अब देखना होगा कि इस सियासी बयानबाजी और राजनीति के बीच नवरात्र का पावन पर्व किस तरह संपन्न होता है.
क्या है मामला?
मध्यप्रदेश में शारदीय नवरात्र की तैयारियां जोरों पर हैं, श्राद्ध पक्ष समाप्त होते ही प्रदेशभर में नवरात्र महोत्सव की रौनक दिखाई देने लगेगी. नवरात्र में जगह-जगह मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित होंगी, पंडाल सजेंगे और गरबा महोत्सव का रंग छाएगा. इन सबके बीच गरबा आयोजनों को लेकर सियासत भी तेज हो गई है. बीजेपी और कांग्रेस के नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं, जिनमें गैर-हिंदुओं की एंट्री से लेकर लव जिहाद तक के मुद्दे शामिल हैं.
नवरात्रि से पहले सियासी गरबा
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा त्योहार वही मनाए जो जिस समुदाय का है, गरबा में कलावा–टीका लगाकर लव जिहादी प्रवेश न करें. आलोक शर्मा का कहना है मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार है, किसी भी लव जिहादी को नहीं छोड़ा जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि तिलक, केसरिया गमछा, कलावा बांधकर गरबा पंडाल में घुसने वालों को अब नहीं छोड़ा जाएगा, जो ऐसी गलती कर रहा है, उसके मकान भी टूट रहे हैं. किसी को लव जिहाद करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.
कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा मुस्लिमों को गरबे में नहीं जाना चाहिए, जब मना है तो नहीं जाना चाहिए...मुस्लिम समाज का गरबे से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन अगर समिति किसी को बुलाती है तो कोई रोक नहीं सकता, बीजेपी का चरित्र यही है कि ऐसे समय में दिशा बदलने का विषय खड़ा कर देती है...
पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा गरबा के माध्यम से देवी जी की पूजा होती है, जो लोग इन परंपराओं को नहीं मानते हैं, उन्हें नहीं जाना चाहिए...यह निर्णय समितियों और संस्थाओं का है जो आयोजन कर रही हैं, सरकार पहले इतना डर तो पैदा करें कि लव जिहादी अंदर घुसने की हिम्मत न करें.