मां-बहन की अपील पर पॉक्सो जज की खिंचाई:आदेश में सजा कहीं एक,कहीं दो साल लिखी, हाईकोर्ट ने कहा- जज के खिलाफ एक्शन हो
भोपाल ।
भोपाल के शाहजहांनाबाद की एक मल्टी में 5 साल की मासूम के साथ दुष्कर्म और हत्या के बहुचर्चित मामले में पॉक्सो कोर्ट की जज कुमुदिनी पटेल के आदेश ने उन्हें मुश्किल में डाल दिया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले में मुख्य आरोपी की आरोपी मां बहन की सजा की अवधि कहीं एक साल और कहीं दो साल लिखी गई है।
हाई कोर्ट ने इसे गंभीर अनियमितता और न्यायाधीश की लापरवाही माना। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनिंद्र कुमार सिंह की डिवीजन बेंच ने रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया कि यह मामला चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाए, ताकि प्रशासनिक स्तर पर जज के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
दरअसल, ट्रायल कोर्ट ने मुख्य आरोपी अतुल निहाले को फांसी की सजा सुनाई थी। वहीं, अतुल की मां बसंती बाई और बहन चंचल को साक्ष्य छुपाने के लिए एक-एक साल की सजा दी गई। आदेश की अंतिम तालिका में सजा को दो-दो साल दिखाया गया।
जुर्माने की राशि न अदा करने पर अंदर की सजा 1 महीने व बाहर 3 माह कर दी गई। आरोपी 27 सितंबर 2024 को गिरफ्तार हुए 10 मार्च 2025 को सजा सुनाई गई।
हाई कोर्ट ने माना- यह टाइपिंग की गलती नहीं
हाई कोर्ट ने नोट किया कि ट्रायल कोर्ट के आदेश के पैरा 145 में बसंती बाई और चंचल बाई को एक-एक साल की सजा दी गई थी। इसी पैरा में चंचल बाई के तीन बच्चे और बसंती बाई की वृद्धावस्था का जिक्र भी था। लेकिन पृष्ठ क्रमांक 78-79 में बनाई गई टेबल में दोषियों के नाम और सजा का उल्लेख अलग था। वहाँ सजा एक साल की जगह दो साल लिखी गई थी। इतना ही नहीं, सजा का वारंट भी दो साल के लिए तैयार किया गया था।
पहले भी ऐसे मामले हुए
- 2022: भोपाल पॉस्को केसः सजा 10 साल लिखी, आदेश में 7 साल। हाई कोर्ट ने स्पष्टीकरण लिया, फैसला सुधारा, जज को चेतावनी।
- 2019: इंदौर मर्डर केसः सजा आजीवन, अवधि गलत। सुप्रीम कोर्ट तक अपील, केवल संशोधन हुआ।
- 2024: ग्वालियर रेप केसः आरोपी का नाम गलत। हाई कोर्ट ने रेक्टीफाइड किया, ट्रायल दोबारा नहीं हुआ।

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