जल जीवन मिशन में गड़बड़ी, केंद्र का अतिरिक्त राशि देने से इंकार, 141 इंजीनियरों को नोटिस
भोपाल।
मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। नल-जल योजना की डीपीआर बिना गांवों का दौरा किए कागजों पर ही तैयार कर दी गई। केंद्र ने बढ़ी लागत का पैसा देने से मना कर दिया, जिसके बाद राज्य सरकार को अपने खजाने से 2,813 करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। इस गड़बड़ी में जिम्मेदार 141 इंजीनियरों को नोटिस जारी किए गए हैं। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने उन 141 इंजीनियरों को नोटिस जारी किए हैं, जिन्होंने बिना फील्ड विजिट और साइट निरीक्षण किए बंद कमरों में बैठकर योजनाओं की डीपीआर तैयार की। इन इंजीनियरों पर यह आरोप है कि इन्होंने कागजों पर योजनाओं के आकलन में भारी गड़बड़ी की, जिसके चलते योजनाओं की लागत बेवजह बढ़ गई। जांच में पाया गया कि संबंधित इंजीनियरों ने न तो गांवों का दौरा किया और न ही स्थलीय स्थिति का आकलन किया। पूरी डीपीआर केवल कागजों पर तैयार की गई। इसी आधार पर विभाग ने 141 इंजीनियरों को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। नोटिस उन इंजीनियरों को भी भेजे गए हैं, जो अब रिटायर हो चुके हैं। ऐसे मामलों में विभागीय स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
केंद्र ने बढ़ी राशि देने से किया इनकार
दरअसल, केंद्र सरकार ने बढ़ी हुई लागत को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने अतिरिक्त 2,813 करोड़ रुपये खर्च करने की स्वीकृति दी, ताकि करीब सात लाख घरों तक नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित न हो।
19 हजार योजनाओं में से 8,358 में गड़बड़ी
प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत 19,000 से अधिक योजनाओं का प्रस्ताव तैयार किया गया था। जांच में सामने आया कि इनमें से 8,358 योजनाओं का आकलन गलत किया गया। डीपीआर में खर्च का अनुमान वास्तविकता से मेल नहीं खा रहा था। अब राज्य सरकार ने कैबिनेट में प्रस्ताव लाकर अतिरिक्त राशि वहन करने को मंजूरी दी है।

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