भोपाल। 
भाजपा विधायक संजय पाठक नई मुसीबत में फंस गए हैं। अपनी कंपनियों के अवैध खनन से जुड़े एक मुकदमे में राहत पाने के लिए उन्होंने मामले की सुनवाई कर रहे हाई कोर्ट जज को ही फोन लगा दिया। जबलपुर मुख्यपीठ के जस्टिस विशाल मिश्रा ​ने इसका उल्लेख आदेश में किया और खुद को केस की सुनवाई से अलग कर लिया है।जस्टिस ने खुलासा किया कि पाठक ने सीधे संपर्क करने की कोशिश की थी। पूरा मामला अब चीफ जस्टिस के पास भेजा गया है। यह केस पाठक की 3 कंपनियों पर दर्ज अवैध खनन की शिकायत से जुड़ा है। सरकार ने इन कंपनियों पर 443 करोड़ रुपए की पेनाल्टी लगाई थी।
ईओडब्ल्यू में केस दर्ज, पर कार्रवाई नहीं हुई, बाद में सरकार ने लगाई थी पेनाल्टी
कटनी निवासी आशुतोष उर्फ मनु दीक्षित ने जनवरी 2025 में शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन और पैसिफिक एक्सपोर्ट्स ने बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया। ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) ने छह महीने तक कार्रवाई नहीं की। जून में दीक्षित ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद प्रमुख सचिव माइनिंग ने जांच टीम बनाई। टीम ने दो बिंदुओं पर जांच की और एक्सेस माइनिंग का आरोप सही पाया। विधानसभा में मुख्यमंत्री ने भी माना कि तीनों कंपनियों से 443 करोड़ की वसूली प्रचलन में है।
कंपनियों की दलील... बिना सुनवाई के पेनाल्टी लगाई गई 
 तीनों कंपनियों ने 22 अगस्त को कोर्ट में इंटरवेंशन एप्लीकेशन लगाई। इसमें कहा गया कि बिना सुनवाई का मौका दिए पेनाल्टी लगा दी गई। आरोप लगाया गया कि शिकायतकर्ता ने राजनीतिक द्वेष से यह कदम उठाया और सरकार पर दबाव बनाया। कंपनियों का कहना था कि मुख्यमंत्री का बयान उनकी छवि खराब कर रहा है। इसी आवेदन की सुनवाई 1 सितंबर को हुई। जस्टिस शर्मा ने खुले कोर्ट में बताया कि पाठक ने उनसे सीधे संपर्क किया था। इसके बाद उन्होंने केस से खुद को अलग कर लिया।
रजिस्ट्रार जनरल के जरिए पाठक पर हो सकता हैं केस
चीफ जस्टिस इंदौर बेंच में सुनवाई कर रहे हैं। लौटने के बाद वे केस को किसी और बेंच में भेज सकते हैं। हाई कोर्ट चाहे तो रजिस्ट्रार जनरल के जरिए पाठक पर केस दर्ज करवा सकता है।प्रदेश में पहला मामला नहीं है। 2021 में शाजापुर एक्साइज अफसर विनय रंगशाही पर भी जज को घूस की पेशकश का आरोप लगा था। उन्होंने अग्रिम जमानत के लिए स्टेनोग्राफर के जरिए 10-15 लाख रु. ऑफर किए थे। जज ने जमानत खारिज कर दी। इंदौर बेंच ने भी याचिका खारिज कर कहा कि सबूत मौजूद है। रंगशाही को पहले विदिशा व फिर शाजापुर में पदस्थ कर दिया गया। मामला महिला से जुड़ा था, जिसमें दहेज प्रताड़ना, जबरन गर्भपात जैसे आरोप थे।