शिव—मोहन का मिलन और सियासी हवा
भोपाल।
संघ प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की 45 मिनट तक हुई बातचीत ने एक बार फिर सियासी हवा दे दी है। यह मुलाकात इसलिए भी अहम है कि बंद कमरे में हुई है। इससे पहले दोनों की मुलाकात दो साल पहले हुई थी। अब राजनीतिक विश्लेषक इस मुलाकात के कई मायने निकाल रहे हैं। इसके पीछे की वजह क्या हो सकती है?
दिल्ली में हुई मुलाकात
बैठक के पहले शिवराज सिंह चौहान एक कार्यक्रम के लिए प्रगति मैदान के भारत मंडपम में मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान की संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ बैठक झंडेवालान स्थित संघ कार्यालय केशव कुंज हुई । जिसमें बंद कमरे के अंदर करीब 45 मिनट तक बातचीत चली। उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक बदलाव कर सकती है। उस लिहाजे से शिवराज सिंह चौहान की मोहन भागवत की मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश में कयासों का बाजार गर्म हो गया है।
दो साल पहले भी 45 मिनट हुई थी चर्चा
मध्य प्रदेश 2023 विधानसभा चुनाव से आठ महीने भी तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की संघ प्रमुख मोहन भागवत से नागपुर में 45 मिनट तक बंद दरवाजे में बातचीत हुई थी। इसमें खास बात यह है कि इस बार भी संघ प्रमुख से शिवराज सिंह चौहान की 45 मिनट ही बंद दरवाजे के भीतर बातचीत हुई है। शिवराज सिंह चौहान का जन्म 5 मार्च 1959 में जैत गांव में हुआ था। किसान परिवार में जन्मे शिवराज सिंह चौहान का आरएसएस से पुराना नाता रहा है। उनके राजनीतिक सफर की शुरुआत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ ही हुआ था। तब वह मात्र 13 साल के थे। वह साल 1975 में मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल का छात्र संघ चुनाव जीतकर अध्यक्ष बने थे। शिवराज सिंह चौहान संगठन कार्य का लंबा अनुभव रखते हैं। वह भाजपा पार्लियामेंट्री बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं। 2019 में पार्टी के सदस्यता अभियान के प्रमुख थे। इस दौरान बीजेपी सदस्य संख्या बढक़र साढ़े 18 करोड़ से अधिक हुई थी। शिवराज सिंह बीजेपी राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, एमपी प्रदेशाध्यक्ष, एमपी बीजेपी युवा मोर्चा अध्यक्ष, भाजयुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष और एबीवीपी के राष्ट्रीय मंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
साल 2023 में लाडली बहना योजना से दिला दी थी जीत
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि साल 2023 विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जीत दिलाने वाले कोई और नहीं बल्कि शिवराज सिंह चौहान ही हैं। अगर उनके द्वारा लाड़ली बहना योजना शुरू नहीं की गई होती तो भाजपा की सरकार एमपी में सरकार नहीं होती। पूरे चुनाव में कांग्रेस ने बढ़त बनाई थी। चर्चाएं तो यहां तक हुईं कि भाजपा के अंदरूनी सर्वे ने तक बता दिया था कि बीजेपी मात्र 10-15 सीटों से चुनाव हारेगी। इससे कम मार्जिन नहीं हो सकता। मगर, जब नतीजे सामने आए तो भाजपा खुद भी हैरान रह गई। जीत का आंकलन किया गया तो पता चला लाड़ली बहना मैजिक एमपी में जमकर चला।
अचानक मुलाकात के क्या मायने
उपराष्ट्रपति चुनाव के बाद भारतीय जनता पार्टी संगठनात्मक बदलाव कर सकती है। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर भाजपा और संघ के बीच कई नामों को लेकर साल भर से मंथन चल रहा है। बीच में कई बार शिवराज सिंह चौहान का नाम भी पार्टी के शीर्ष पद की रेस में आया है। विश्लेषक इस बैठक के अलग-अलग मायने निकल रहे हैं। हालांकि, बंद कमरे के भीतर संघ प्रमुख मोहन भागवत और शिवराज सिंह चौहान के बीच 45 मिनट तक चली बैठक में क्या बातचीत हुई? इस पर अभी तक सस्पेंस बरकरार है।

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