भिंड। 
प्रदेश के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और लहार के पूर्व विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने भिंड जिले समेत पूरे मध्य प्रदेश में खाद की बिक्री पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सहकारिता मंत्री डॉ. विश्वास सारंग को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि लहार और दबोह के वेयरहाउस से 10 हजार से ज्यादा डीएपी और यूरिया की बोरियां ब्लैक में बेची गईं। उन्होंने पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग की है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने अपने पत्र में लिखा कि म.प्र. राज्य विपणन संघ (मार्कफेड) भोपाल के अंतर्गत आने वाले लहार और दबोह के वेयरहाउस से किसानों को मिलने वाली खाद की बोरियां ब्लैक में बेच दीं। उन्होंने बताया कि गोदाम से लगभग 10 हजार से अधिक डीएपी, यूरिया और एन.पी.के. की बोरियां 100 से 200 रुपए प्रति बोरी अधिक कीमत में ब्लैक कर बेची गईं।
एसडीएम की जांच में स्टॉक कम मिला था
उन्होंने कहा कि लहार के एसडीएम विजय यादव को जब खाद की कालाबाजारी की शिकायतें मिलीं, तो उन्होंने मौके पर छापा मारा। जांच के दौरान हजारों खाद की बोरियां स्टॉक में कम पाई गईं। इसके बाद गोदाम प्रभारी दीपक शर्मा को निलंबित किया गया और लहार गोदाम को सील कर जांच के निर्देश दिए गए।
दोषी गोदाम प्रभारी को दिया जा रहा संरक्षण'
डॉ. सिंह ने आरोप लगाया कि जिले के अधिकारियों द्वारा अब तक दोषी गोदाम प्रभारी के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारी को संरक्षण दिया जा रहा है, जिससे किसानों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
15 दिन से बंद हैं गोदाम, सुबह 4 बजे से भटक रहे किसान
उन्होंने बताया कि लहार और दबोह के दोनों गोदाम पिछले 15 दिनों से बंद पड़े हैं, जिसके कारण हजारों किसान, महिलाएं और बच्चे सुबह चार बजे से खाद के लिए भटक रहे हैं। किसानों को पर्याप्त खाद न मिलने से कृषि कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
'खुले बाजार से खाद खरीदकर पूर्ति दिखाने का प्रयास'
डॉ. सिंह ने यह भी कहा कि जिले के अधिकारी गोदाम प्रभारी से मिलीभगत कर खुले बाजार से खाद खरीदकर गोदामों में पूर्ति दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। यह किसानों के साथ सीधा छल है।
'सरकार निष्पक्ष जांच कराकर कार्रवाई करे'
उन्होंने कहा: “सरकार को चाहिए कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराए, दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए और किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी मेहनत और फसल दोनों सुरक्षित रह सकें।”
डॉ. गोविंद सिंह के पत्र के बाद भिंड जिले में खाद वितरण व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नई हलचल मच गई है। किसान अब सरकार से त्वरित कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।