भिंड। 
भिंड जिले के अटेर क्षेत्र के सुरपुरा थाना क्षेत्र में दीपावली की रात दलित युवक के साथ मारपीट के मामले ने अब सामाजिक रूप ले लिया है। इस मामले में सवर्ण समाज एकजुट हो गया है। गांव में आयोजित महापंचायत में सवर्ण समाज के लोगों ने जाटव समाज का बहिष्कार करने की घोषणा की और शपथ लेकर सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक संबंध खत्म करने का निर्णय लिया।
सुरपुरा गांव में गुरुवार को सवर्ण समाज की बड़ी महापंचायत आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। पंचायत में लोगों ने कहा कि वे अब जाटव समाज से किसी भी प्रकार का लेनदेन, खेती-बटाई या सामाजिक उठना-बैठना नहीं रखेंगे। महापंचायत में शपथ दिलाई गई कि सवर्ण समाज के लोग न तो उनके खेतों में काम करेंगे और न ही किसी तरह की आर्थिक मदद या व्यवहार रखेंगे।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि अब तक सवर्ण समाज, जाटव समाज की हर जरूरत में सहयोग करता आया है। जरूरतमंदों को आर्थिक मदद दी जाती थी, गरीब परिवारों की बेटियों की शादियों में सहयोग दिया जाता था, और खेती-बाड़ी में भी सहारा प्रदान किया जाता था। लेकिन हाल ही में जिस तरह झूठे मामलों में सवर्ण समाज के लोगों को फंसाया जा रहा है, उससे अब दूरी बनाना ही उचित होगा।
सभा में एक वक्ता ने कहा कि ज्ञान सिंह जाटव और सोनू बरुआ के बीच पहले से पारिवारिक संबंध थे। ज्ञान सिंह, सोनू बरुआ के यहां ड्राइविंग का काम करता था और दोनों के बीच पैसों का लेनदेन भी था। करीब तीन से चार साल पहले ₹50,000 का लेनदेन हुआ था, जिसको लेकर विवाद बढ़ा। लेकिन जिस तरह इस मामले को बंधक बनाने और पेशाब पिलाने जैसे अमानवीय रूप में पेश किया गया, वह पूरी तरह गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले के पीछे भीम आर्मी का षड्यंत्र है, जो समाज में जातीय खाई बढ़ाने का काम कर रही है।
सभा में यह भी कहा गया कि भीम आर्मी के लोगों द्वारा झूठे एससी-एसटी मामलों में सवर्ण समाज के लोगों को फंसाया जा रहा है और इस माध्यम से वे आर्थिक लाभ उठा रहे हैं। इसलिए समाज ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगे से जाटव समाज के साथ किसी भी प्रकार के संबंध नहीं रखे जाएंगे।