याचिकाकर्ता की ग्राउंड रिपोर्ट पर हाईकोर्ट सख्त: बालाघाट में बच्चों की मौत पर सरकार और कलेक्टर को नोटिस
बालाघाट।
जिले में संक्रामक बीमारियों के चलते 30 से अधिक बच्चों की हुई मौतों के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। अदालत ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की तरफ से पेश की गई जमीनी निरीक्षण रिपोर्ट को पूरी गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट की कार्यवाहक चीफ जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और जिला कलेक्टर समेत अन्य अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
न्यूज रिपोर्ट से शुरू हुई थी जनहित याचिका की कहानी
नरसिंहपुर निवासी अधिवक्ता अंशुल तिवारी की तरफ से बालाघाट में बच्चों की मौत के संबंध में एक जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि प्रभावित क्षेत्र में बच्चों को समय पर और पर्याप्त उपचार नहीं मिल रहा है। स्थिति यह थी कि महज 50 बिस्तरों की क्षमता वाले अस्पताल में लगभग 400 बच्चों का एक साथ इलाज किया जा रहा था। मामले की शुरुआती सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने स्पष्ट किया था कि केवल अखबारों में छपी खबरों के आधार पर जनहित याचिका दायर करना उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को खुद मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति की पड़ताल करने और अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए थे।
याचिकाकर्ता की ग्राउंड रिपोर्ट में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के विक्की ने कोर्ट को बताया कि आदेश के अनुपालन में उन्होंने खुद प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था। अदालत के समक्ष जो रिपोर्ट पेश की गई, उसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रभावित क्षेत्रों में लगे हैंडपंपों से दूषित और पीला पानी निकल रहा है। इसके अलावा, बच्चों और महिलाओं को कई महीनों से समय पर पौष्टिक आहार नहीं मिल रहा था। क्षेत्र में चारों तरफ भारी गंदगी पसरी हुई थी, जिसके कारण संक्रामक बीमारियों ने विकराल रूप ले लिया और बच्चों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा था। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि जब 30 से अधिक बच्चों की मौत हो गई, तब जाकर प्रशासन की नींद खुली और अस्पतालों में बिस्तर बढ़ाने के साथ साफ-सफाई के प्रबंध किए गए।
कोर्ट ने दिए कड़े निर्देश
युगलपीठ ने निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत रिपोर्ट को आधिकारिक रूप से याचिका में शामिल किया जाए। कोर्ट ने सभी अनावेदकों से इस मामले में जवाब मांगा है और सुनवाई की अगली तारीख 18 सितंबर तय की है। याचिकाकर्ता की तरफ से इस मामले में अधिवक्ता अभिषेक पांडे और अतुल कुमार शुक्ला ने पैरवी की।

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