अशोकनगर। 
मध्यप्रदेश पुलिस के प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी ने अदम्य साहस और कर्त्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए एक बड़ा हादसा टाल दिया। शनिवार सायंकाल ईसागढ़ होते हुए इंदौर जा रही एक बस में अशोकनगर जिले के बामनवर के पास अचानक आग लग गई। बस में लगभग 40 से 45 यात्री सवार थे। इस हादसे से पुर प्रदेश में सनसनी फैल गई थी।
प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी ने दिखाया साहस 
बस में आगे की पंक्ति में बैठे कदवाया थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी ने सबसे पहले बस के बोनट से धुआं उठते देखा और तुरंत ड्राइवर को इसकी सूचना दी। ड्राइवर ने बस को साइड में रोका, तभी आग फैलने लगी। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए प्रधान आरक्षक रघुवंशी और क्लीनर छोटा केवट बस के गेट से बाहर निकले, परंतु उसी दौरान गेट के आसपास आग फैल गई जिससे यात्रियों के लिए बाहर निकलना कठिन हो गया।
दिखाया असाधारण साहस 
बिना देर किए दोनों ने असाधारण साहस दिखाते हुए बस की खिड़कियों के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया। धुएं और लपटों के बीच उन्होंने अंतिम यात्री के सुरक्षित बाहर आने तक राहत कार्य जारी रखा। उसी समय पूरी बस आग की चपेट में आ चुकी थी, परंतु दोनों के सूझबूझ भरे निर्णय और वीरता से सभी यात्रियों की जान सुरक्षित रही।
पुलिस की कर्तव्यनिष्ठा 
प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी की यह कार्यवाही न केवल उनकी बहादुरी को दर्शाती है बल्कि यह भी सिद्ध करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस के अधिकारी और कर्मचारी हर परिस्थिति में जनता की सुरक्षा और सहायता के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।
DGP ने किया इनाम का ऐलान
मप्र पुलिस विभाग ने इस साहसिक कार्य की सराहना करते हुए प्रधान आरक्षक अरविंद रघुवंशी को दस हजार रुपए का नगद पुरस्कार प्रदान करने की घोषणा की है। विभाग ने कहा कि "यदि समय रहते बहादुरी न दिखाई जाती, तो यात्रियों के गंभीर रूप से झुलसने या जनहानि की पूरी आशंका थी।