खींचतान के बीच पहली बार नगर पालिका पहुंची अध्यक्ष:शिवपुरी में पार्षदों के विरोध पर बोलीं- यह घर का मामूली विवाद, सब मैनेज हो जाएगा
शिवपुरी ।
शिवपुरी नगर पालिका में पिछले ढाई महीने से चल रहा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। लंबे समय बाद शुक्रवार शाम करीब 4 बजे पहली बार नगर पालिका कार्यालय पहुंचीं अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने अपने खिलाफ खड़े हुए 18 पार्षदों के सवाल पर बेबाक जवाब दिया। अध्यक्ष से जब पूछा गया कि आखिर क्यों 11 भाजपा पार्षद और 3 भाजपा समर्थित पार्षद सहित 18 पार्षद अचानक उनके खिलाफ हो गए, तो उन्होंने कहा “यह तो पूरे प्रदेश में चल रहा है, सब जगह उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। यह घर का मामूली विवाद है और सब मैनेज हो जाएगा।”
बोलीं- ढाई साल पहले भी ऐसी स्थिति बनी थी
अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने यह भी याद दिलाया कि ढाई साल पहले भी इसी तरह की स्थिति बनी थी और तब भी हालात संभल गए थे। उनका मानना है कि राजनीति में ऐसे उतार-चढ़ाव आते रहते हैं और समय के साथ सबकुछ फिर सामान्य हो जाएगा।
बुधवार तक करेंगे फैसला
इधर, कलेक्टर वीरेंद्र कुमार चौधरी ने कहा कि 18 पार्षदों ने इस्तीफों को लेकर अभी कोई फैसला नहीं किया है। उन्होंने इस्तीफों में भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं। इस संबंध में कार्रवाई चल रही है। ऐसे में बुधवार तक इस्तीफों पर फैसला लेंगे। इस्तीफे स्वीकारेंगे या नहीं, इस पर अभी कुछ नहीं कह सकते। भ्रष्टाचार के मामले में तीन सीएमओ निलंबित कर दिए गए हैं। नपाध्यक्ष के खिलाफ क्या एक्शन होना, यह भोपाल से ही तय होगा।
अध्यक्ष को नहीं हटा पाए तो पार्षदों ने दिया इस्तीफा
बता दें कि कलेक्टर ने अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन अमान्य कर दिया तो दो दिनों पहले 18 विरोधी पार्षदों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सभी पार्षद माधव चौक स्थित हनुमान मंदिर पर जमा हुए। यहां से डीजे के साथ जुलूस निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। रास्ते भर लोगों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया। डीजे पर देशभक्ति गीत बजते रहे। कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर सभी पार्षदों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा सौंप दिया।पार्षदों ने कहा- जब अध्यक्ष को हटाने का प्रयास असफल रहा तो अब त्यागपत्र देकर अपनी प्रतिज्ञा को पूरा करना उनका कर्तव्य है। इस्तीफा सौंपने वालों में 12 भाजपा, 2 निर्दलीय, 4 कांग्रेस के पार्षद हैं। इससे पहले 11 जून के 22 पार्षदों ने करैरा स्थित बगीचा सरकार मंदिर में नगरपालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा को पद से हटाने की सौगंध ली थी। मान्यता है कि यहां जो कसम खाई जाती है, वो टूटती नहीं है। अगर कसम टूटी तो कोढ़ जैसी बीमारी होती है। मान्यता के तहत पार्षदों ने इसी से बचने के लिए इस्तीफा दिया है।

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