छतरपुर।

छतरपुर में थोक के भाव फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र बनाने का भंडाफोड़ हुआ है. छतरपुर जिले के महतौल गांव में मुस्लिम, ईसाई की आबादी शून्य है, लेकिन इनके नाम पर धड़ाधड़ जन्म प्रमाण-पत्र जारी किए गए. इस छोटी सी पंचायत से देश के कई प्रदेशों के जन्मप्रमाण पत्र बनाये जाने की पुष्टि हुई है. ये सारा कारनामा पिछले साल 6 माह के अंदर हुआ. 1134 जन्म प्रमाण पत्रों की जांच की गई तो पता चला कि इनमें से केवल एक ही सही है. शेष फर्जी हैं.
पंचायत सचिव ने धड़ाधड़ बांटे फर्जी जन्म प्रमाण-पत्र
नौगांव जनपद पंचायत के तहत महतौल ग्राम पंचायत आती है. यहां पंचायत सचिव के रूप में प्रेमनंद रैकवार तैनात है. सचिव ने ही फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जारी किए. इसकी शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया. जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया ने सचिव प्रेमचंद रैकवार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई. टीम ने जो रिपोर्ट पेश की, वह चौंकाने वाली है. रिपोर्ट देखकर अधिकारियों के भी होश उड़ गए.
6 माह में बनाए 1134 प्रमाण-पत्र, केवल एक सही
जांच टीम ने पाया कि बीते साल अप्रैल से सितंबर 2025 तक 1134 जन्म प्रमाण पत्र बनवाए गए. जब जांच की तो पंचायत में सिर्फ़ एक जन्म प्रमाण पत्र सही पाया गया, बाकी के 1133 जन्म प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए. खास बात ये है कि इस पंचायत में एक भी मुस्लिम और ईसाई नहीं रहता लेकिन इनके नाम पर बड़ी संख्या में जन्म प्रमाण पत्र बनाए गए.मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला पंचायत CEO नमःशिवाय अरजरिया ने नौगांव जनपद के महतौल पंचायत के सचिव प्रेम चंद अहिरवार और सीएससी संचालक मनोहर कुशवाहा के खिलाफ नौगांव पुलिस थाने मे मामला दर्ज करवाया है.
फर्जीवाड़े का खुलासा कैसे हुआ
मामले का खुलासा तब हुआ, जब बीते दिनों हाई कोर्ट इंदौर के अधिवक्ता सुभाष पंचाल छतरपुर आये. उन्होंने बताया कि उनके पक्षकार रिहान निवासी इंदौर का विवाह अंजुम खान से हुआ था. विवाह के समय अंजुम की उम्र 21 वर्ष बताई गई, लेकिन परिजनों ने विरोध कर थाना चंदननगर, इंदौर में नाबालिग से विवाह और अपहरण का मामला दर्ज कराया. जांच के दौरान परिवार की तरफ से अंजुम का जो जन्म प्रमाण-पत्र पेश किया गया, वह छतरपुर की ग्राम पंचायत महतौल से जारी बताया गया था.