भोपाल। 
भोपाल का 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा इस बार और भी भव्य और संगठित रूप में आयोजित होने जा रहा है। 14 से 17 नवंबर तक ईटखेड़ी में होने वाले इस विश्वस्तरीय आयोजन में करीब 12 लाख से अधिक जायरीन के आने की उम्मीद है। इज्तिमा कमेटी ने पिछले वर्ष की तुलना में सभी व्यवस्थाओं में 20% का इज़ाफ़ा किया है, चाहे वह पंडाल, खानपान, सर्विस एरिया या पार्किंग का विस्तार हो।
120 एकड़ में पंडाल, 300 एकड़ में पार्किंग एरिया
कमेटी के मीडिया कोऑर्डिनेटर डॉक्टर उमर हफीज इस बार पंडाल का क्षेत्रफल 100 एकड़ से बढ़ाकर 120 एकड़ कर दिया गया है। वहीं जायरीन की आमद को देखते हुए पार्किंग एरिया को 300 एकड़ से अधिक तक फैला दिया गया है। कुल 70 पार्किंग जोन बनाए जा रहे हैं ताकि ट्रैफिक मैनेजमेंट में कोई दिक्कत न हो। कमेटी प्रभारी डॉ. उमर हफीज के अनुसार, “हमारा लक्ष्य 23 अक्टूबर तक 50% कार्य पूरा करने का है, उसके बाद समीक्षा बैठक में हर सेक्शन की जांच होगी।
30 हजार प्रशिक्षित लोग संभालेंगे व्यवस्थाएं
पूरे आयोजन की व्यवस्था 30 हजार प्रशिक्षित और अनुभवी लोगों के हाथों में है। इनमें 25 हजार वॉलंटियर्स इज्तिमा कमेटी के हैं और 5 हजार का अमला नगर निगम, प्रशासन और पुलिस बल से जुड़ा है। ये सभी क्राउड मैनेजमेंट, सफाई, सुरक्षा और पंडाल व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। भीड़ बढ़ते ही टीम नए टेंट लगाने का काम तुरंत शुरू कर देती है। सफाईकर्मी बोरा लेकर चलते हैं ताकि कहीं भी कचरा इकट्ठा न हो।
20% बढ़े इंतजाम
कमेटी ने इस बार की तैयारियों में हर स्तर पर 20% की वृद्धि की है। लाइटिंग, साउंड, पानी और खानपान व्यवस्था को और मज़बूत किया गया है। सर्विस एरिया में अतिरिक्त ट्यूबवेल और जल टैंकर लगाए जा रहे हैं। फूड ज़ोन का आकार भी बढ़ाया गया है ताकि जायरीन को कतार में ज़्यादा देर न लगानी पड़े।
सुरक्षा और सुविधा-प्रशासन की संयुक्त निगरानी
इज्तिमा स्थल पर इस बार फायर सेफ्टी, मेडिकल यूनिट और ट्रैफिक कंट्रोल के लिए प्रशासन और कमेटी की संयुक्त टीम तैनात रहेगी। एंट्री और एग्ज़िट पॉइंट्स को पुनः डिजाइन किया गया है ताकि आवागमन सुगम रहे। सुरक्षा कारणों से पंडाल की क्षमता 1.80 लाख से घटाकर 1.40 लाख रखी गई है।
इज्तिमा 5 बड़े इस्लामिक आयोजनों में एक
भोपाल का आलमी तब्लीगी इज्तिमा दुनिया के 5 सबसे बड़े इस्लामिक आयोजनों में से एक माना जाता है। दुनियाभर से इसमें लाखों लोग शामिल होते हैं। दुनिया में केवल 3 देश भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में इसका आयोजन होता है।