दलालों के भरोेसे चल रहा है मप्र का स्वास्थ्य विभाग, मासूमों की मौत के बाद भी नहीं सुधरा स्वास्थ्य विभाग, बच्चों को दी गई अमानक दवा, अब मंगाई जा रही वापस
भोपाल।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप से 25 बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद अब यह खुलासा हुआ है कि राज्यभर के आंगनबाड़ियों और स्कूलों में छोटे बच्चों को अमानक दवा पिलाई जा रही थी। यह दवा एल्बेंडाजोल आईपी 400 (Elbentrazole 400 mg) है, जो बच्चों को पेट के कीड़े मारने के लिए दी जाती है। अब जांच में सामने आया है कि यह दवा मानक गुणवत्ता पर खरी नहीं उतरी। इसे “नो स्टैंडर्ड क्वालिटी” घोषित कर दिया गया है और पूरे प्रदेश से इसका वितरण रोकने तथा स्टॉक वापस मंगाने के आदेश जारी कर दिए गए हैं।
अशोकनगर से सीएमएचओ का पत्र आया सामने
मामला उस समय सामने आया जब अशोकनगर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) ने सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि बैच नंबर B251362 की एल्बेंडाजोल 400 दवा की प्रयोगशाला जांच में यह “अमानक” पाई गई है।
पत्र में निर्देश दिए गए कि इस दवा का तुरंत वितरण रोका जाए और जहां-जहां दवा बांटी जा चुकी है, वहां से वापस ली जाए। पत्र के अनुसार, यह बैच पहले से ही प्रदेश के कई जिलों में भेजा जा चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कितने बच्चों ने यह दवा खाई और उन पर क्या असर पड़ा?
गंभीर सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग
इस पूरे मामले ने प्रदेश के स्वास्थ्य तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं —
- 1. बच्चों को दी जाने वाली दवा का टेस्ट पहले क्यों नहीं कराया गया?
- 2. अमानक दवा की खरीद की अनुमति किसने दी?
- 3. जिन बच्चों ने यह दवा खा ली है, क्या उनका स्वास्थ्य परीक्षण हुआ है?
- 4. क्या दोषी अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित किया जाएगा?
- 5. क्या इस दवा को सप्लाई करने वाली कंपनी को ब्लैकलिस्ट किया जाएगा?
स्वास्थ्य विभाग दलालों के भरोसे?
मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग “ठेकेदार संस्कृति” में फंस गया है। दवाइयों की खरीद, सप्लाई और परीक्षण का पूरा काम प्राइवेट एजेंसियों और ठेकेदारों के हवाले है। आज स्वास्थ्य विभाग अधिकारी नहीं, ठेकेदार चला रहे हैं। सरकारी निगरानी लगभग खत्म हो चुकी है। यही कारण है कि जहरीली सिरप के बाद अब अमानक दवा का मामला सामने आया है।”
गौरतलब है कि पहले ही छिंदवाड़ा में सिरप कांड से पहले ही जनता भयभीत थी। अब अमानक एल्बेंडाजोल की खबर से अभिभावकों की चिंता और बढ़ गई है। कई जिलों में माता-पिता ने बच्चों को दी गई दवाओं की जांच की मांग शुरू कर दी है।

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