देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर का दागदार निगम दफ्तर:40 से अधिक जगहों पर तंबाकू-गुटखे की पीक; गंदगी से पटा मिला शौचालय
भोपाल।
देश का दूसरा सबसे साफ शहर भोपाल का नगर निगम कार्यालय गंदगी से पटा हुआ है। निगम दफ्तर के कोने और दीवारें तंबाकू-गुटखे की पीक से बेरंग हो चुकी हैं। हर रोज हजारों लोग यहां अपनी समस्याओं को लेकर आते हैं, लेकिन शौचालय देखकर मुंह फेर लेते हैं। यही हालात इसी भवन में प्रथम तल पर स्थित रजिस्ट्रार ऑफिस के हैं।
जहां से प्लानिंग वहीं गंदगी
देश का दूसरा सबसे साफ शहर का पुरस्कार मिलने पर जश्न मनाया गया, लड्डू भी बंटे, लेकिन जिस निगम के दफ्तर ने यह गौरव दिलाया, उसी निगम के अपने ही दफ्तर गंदगी से पटे हुए हैं। लोगों का कहना है कि निगम अपने घर को साफ नहीं रख सकता, तो शहर को क्या रखेगा। नगर निगम शहर में स्वच्छता अभियान चलाता है, लेकिन उसका असर दफ्तर में क्यों नहीं दिखता? क्या ये सिर्फ दिखावा है?
स्वच्छता पुरस्कार की चमक
भोपाल ने हाल ही में देश के दूसरे सबसे साफ शहर का तमगा हासिल किया। 17 जुलाई 2025 को स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 में 12,500 में से 12,067 अंक प्राप्त कर भोपाल नगर निगम ने यह उपलब्धि हासिल की, जिससे शहर में जश्न का माहौल था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस अवसर पर महापौर मालती राय और निगम आयुक्त हरेंद्र नारायण को सम्मानित किया।
निगम दफ्तर में पसरी गंदगी
दफ्तर में रोजाना करीब 1000 से ज्यादा लोग अपने कामों को लेकर आते हैं। उनका कहना है कि 'बाथरूम की हालत इतनी खराब है कि महिलाएं और बच्चे मजबूरी में भी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते। अगर निगम अपने कर्मचारियों के लिए ही जवाबदेही तय नहीं कर पा रहा, तो शहर की व्यवस्था कैसे बनी रहेगी।'

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