महाकाल मंदिर में बिना जेब के कपड़े पहनकर गिना जाता है कैश! 2018 की उस एक चोरी ने बदल डाला महाकाल का पूरा सिस्टम, दान पहुंचा 144 करोड़
उज्जैन।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में महाकाल मंदिर ने इतिहास रचते हुए 144 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड आय दर्ज की है। यह आंकड़ा पिछले साल यानी 2024-25 के मुकाबले करीब 27 करोड़ रुपये ज्यादा है। लेकिन इस जादुई आंकड़े के पीछे सिर्फ भक्तों की श्रद्धा नहीं, बल्कि मंदिर प्रशासन का वह कड़ा और पारदर्शी सुरक्षा तंत्र है, जिसने भ्रष्टाचार की हर गुंजाइश को खत्म कर दिया।
एक चोरी जिसने बदल दिया पूरा सिस्टम
इस ईमानदारी की नींव आज से ठीक आठ साल पहले, 22 अगस्त 2018 को पड़ी थी। उस वक्त दान पेटी की गिनती के दौरान एक कर्मचारी, सीपी शर्मा, को सीसीटीवी कैमरों ने 2000 और 500 रुपये के नोट अपनी जेब और जूतों में छिपाते हुए पकड़ लिया था। तत्कालीन कलेक्टर और मंदिर समिति के अध्यक्ष संकेत भोंडवे ने तुरंत एफआईआर दर्ज कराकर सख्त कदम उठाए। उस एक घटना के बाद मंदिर की गिनती व्यवस्था को पूरी तरह से रीबूट कर दिया गया।
बिना जेब के कपड़े और कड़ा पहरा
मौजूदा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद है कि परिंदा भी पर नहीं मार सकता। सहायक प्रशासक और पीआरओ आशीष फलवाड़िया के मुताबिक, अब दान पेटियों को कड़ी सुरक्षा के बीच ऊपरी मंजिल पर बने काउंटिंग रूम में लाया जाता है। इस कमरे में एंट्री और एग्जिट पर हर कर्मचारी की गहन शारीरिक तलाशी होती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि गिनती करने वाले कर्मचारियों को विशेष रूप से बिना जेब वाले कपड़े और प्लेन एप्रन पहनने होते हैं, ताकि कोई एक रुपया भी न छिपा सके।
पारदर्शिता से बढ़ा भक्तों का भरोसा
अब नोटों की गिनती मंदिर का स्टाफ नहीं, बल्कि अलग-अलग बैंकों के कर्मचारी रोस्टर के आधार पर करते हैं। अधिकारियों और निरीक्षकों की मौजूदगी में होने वाली इस पूरी प्रक्रिया की कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग होती है। इसी फुलप्रूफ अकाउंटेबिलिटी का नतीजा है कि 2021-22 के बाद से मंदिर की आय लगातार बढ़ रही है। इस साल ऑनलाइन क्यूआर कोड से 3.6 करोड़ और अन्नक्षेत्र से 3.38 करोड़ की आय हुई, जो यह साबित करती है कि जब व्यवस्था साफ हो, तो भक्तों का भरोसा भी कई गुना बढ़ जाता है।
यह भी समझिए
- महाकाल मंदिर की आय में इस बार कितनी बढ़ोतरी हुई है और मुख्य जरिया क्या रहा?
- मंदिर की कुल आय 144 करोड़ रुपये रही, जो पिछले साल से 27 करोड़ रुपये अधिक है। इसमें सबसे बड़ा योगदान मंदिर की 95 दान पेटियों का रहा, जिनसे 62 करोड़ रुपये से ज्यादा का कैश मिला।
- साल 2018 के चोरी के हादसे के बाद मंदिर प्रशासन ने क्या बड़े सुधार किए?
- प्रशासन ने मंदिर स्टाफ से गिनती का हक छीनकर इसे बैंक कर्मचारियों को सौंप दिया। अब गिनती करने वाले बिना जेब के कपड़े पहनते हैं और पूरी प्रक्रिया की हाई-डेफिनिशन कैमरों से लाइव वीडियोग्राफी होती है।
- मंदिर में कैश के अलावा डिजिटल और अन्य माध्यमों से कितना दान आया?
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में ऑनलाइन क्यूआर कोड के जरिए 3.6 करोड़ रुपये, कैश काउंटरों से 5.5 करोड़ रुपये, और अन्नक्षेत्र के माध्यम से 3.38 करोड़ रुपये का दान बाबा महाकाल के खजाने में आया।

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