उज्जैन। 
मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर साधु-संतों ने तैयारी शुरू की है. इस क्रम सिंहस्थ कुंभ 2028 में फर्जी साधुओं को पकड़ने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने उत्तराखंड की तर्ज पर कालनेमी अभियान चलाने की घोषणा की है. गृहस्थ साधुओं पर भी कार्रवाई की बात कहते हुए अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने कहा कि बीवी-बच्चों के साथ रह रहे साधु भी सावधान हो जाए. धन, पद और प्रतिष्ठा जैसे सांसारिक मोह को त्याग इंसान संन्यास ग्रहण करता है, लेकिन कुछ बहुरुपियों के चक्कर में अब दुनियावी रिश्ता तोड़ चुके साधु-संत भी इसके शिकार होंगे. सिंहस्थ कुंभ 2026 के मद्देनजर साधुओं की पहचान के लिए कालनेमी अभियान शुरू किया जाएगा और साधुओं के लिए आधार कार्ड और अखाड़ा आईडी कार्ड अनिवार्य हो जाएगा. 
फर्जी साधुओं पर जेल भिजवाने के लिए कालनेमी अभियान की शुरूआत
गौरतलब है देशभर में फर्जी साधुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. इसी को देखते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष ने फर्जी साधुओं पर अंकुश लगाने और जेल भिजवाने के लिए कालनेमी अभियान चलाने की घोषणा की गई है. अध्यक्ष रविंद्र पुरी कहा कि बड़ी संख्या में विधर्मी साधू का चोला पहनकर घूम रहे है. इनमें उग्रवादी भी हो सकते हैं.
साधु संत के पास आधार कार्ड और अखाड़े का आईडी होना जरूरी
उल्लेखनीय है उत्तराखंड में हाल में कालनेमी अभियान चलाकर कई नकली साधुओं को जेल भेजा है. उत्तराखंड से प्रेरणा लेते हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषध उज्जैन सिंहस्थ कुंभ से पूर्व कालनेमी अभियान चलाकर भगवा पहनकर घूम रहे नकली साधुओं की धरपकड़ करेंगे और उन्हें जेल भिजवाएंगे. अखिला भारतीय अखाड़ा परिष्द अध्यक्ष ने कहा कि असली साधु संत के पास आधार कार्ड ओर अखाड़े का आईडी कार्ड  होना जरूरी है. अखाड़ा परिषद द्वारा सिंहस्थ 2016 में मन्दाकिनी देवी को महामंडलेश्वर की उपाधि दी गई थी, लेकिन आपराधिक केस देस होने पर साल 2024 में उन्हें पद से बर्खास्त कर दिया था. हाल ही में उन पर फिर एक महामंडलेश्वर को रेप केस में फंसाने का केस दर्ज हुआ है. हालांकि मंदाकिनी ने इसे लेकर अध्यक्ष पूरी पर भी झूठा फंसाने का आरोप लगाया है.
गृहस्थ साधू-संतों को चेतावनी, बच्चों को पालना उनका काम नहीं
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष रविन्द्र पुरी ने कहा कि बीवी-बच्चों के साथ रह रहे साधु भी सावधान हो जाए, क्योंकि संतों का काम परमार्थ,यज्ञ, अनुष्ठान करना, विद्यालय चलाकर गरीब बच्चों को शिक्षित करना है, बीवी-बच्चों को पालना नहीं, इसलिए जो साधु संत बीवी बच्चों के साथ रह रहे उन पर भी कार्रवाई की जाएगी.