उज्जैन पहुंच रहे थे हजारों किसान, इंटेलिजेंस की रिपोर्ट देख हिल गई सरकार, तो इसलिए हुई लैंड पूलिंग कैंसिल
उज्जैन।
मध्य प्रदेश सरकार ने उज्जैन में प्रस्तावित आध्यात्मिक शहर सिंहस्थ के लिए भूमि अधिग्रहण की योजना को वापस ले लिया है। यह फैसला किसानों के विरोध प्रदर्शन से ठीक पहले लिया गया। सरकार ने किसानों की मांगों को मानते हुए यह कदम उठाया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भारतीय किसान संघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद सरकार ने भूमि अधिग्रहण का आदेश रद्द कर दिया। यह फैसला ऐसे समय में आया जब हजारों किसान विरोध प्रदर्शन करने वाले थे।
इस बात से नाराज थे किसान
इस योजना के तहत 17 गांवों के करीब 1,800 भूस्वामियों से 2,378 हेक्टेयर जमीन ली जानी थी। किसान इस बात से नाराज थे कि उनकी जमीन स्थायी रूप से ले ली जाएगी। वे लंबे समय से चली आ रही प्रथा के अनुसार, कुंभ मेले के दौरान अस्थायी रूप से जमीन का उपयोग करने और बाद में उसे वापस लौटाने की मांग कर रहे थे।
लैंड पूलिंग निरस्त होने पर बजे ढोल
सरकार ने कहा कि अस्थायी टाउनशिप कुंभ मेले के दौरान कहीं और बनाई जाएगी। जैसे ही यह खबर फैली, किसानों में खुशी की लहर दौड़ गई। उज्जैन जिले के साथ-साथ अलीराजपुर, झाबुआ और पश्चिमी मध्य प्रदेश के अन्य हिस्सों से भी किसान शहर में इकट्ठा हो गए थे। वे ढोल-नगाड़ों पर नाचने लगे और मिठाइयां बांटकर अपनी खुशी जाहिर की।
केंद्र से आए थे निर्देश
केंद्र से मिले निर्देशों के बाद किसान संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री के बुलावे पर उज्जैन से भोपाल आया था। मुख्यमंत्री के साथ सीएम हाउस में एक बैठक हुई जिसमें किसान संघ, भाजपा के पदाधिकारी, उज्जैन के जनप्रतिनिधि और जिला प्रशासन के अधिकारी शामिल थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तत्काल नगरीय प्रशासन विकास विभाग और जिला प्रशासन को इस संबंध में आदेश जारी करने के निर्देश दिए। यह मुलाकात सोमवार रात को हुई थी।
इंटेलिजेंस की रिपोर्ट से हिली सरकार
दरअसल, सिंहस्थ के लिए उज्जैन में 2 हजार 376 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना था। किसान इस जमीन पर स्थायी निर्माण का विरोध कर रहे थे। भारतीय किसान संघ ने मुख्यमंत्री को इस संबंध में एक मांग पत्र सौंपा था। इस फैसले के बाद 18 नवंबर को होने वाला प्रदर्शन स्थगित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री द्वारा लैंड पूलिंग एक्ट को खत्म करने के बाद अब कम संख्या में किसान एक रैली निकालेंगे। सरकार के पास आ रही इंटेलिजेंस की रिपोर्ट ने सरकार को हिलाकर रख दिया था। इसके कारण उज्जैन में अव्यवस्था फैल सकती थी। इसी वजह से सरकार ने अपना फैसला बदल दिया।

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