सीधी। 
मध्य प्रदेश के सीधी के अमिलिया में अंबेडकर जयंती रैली में हिंसा गाड़ी हटाने को लेकर शुरू हुई था। बाद में यह दलित V/s सवर्ण विवाद बन गया। करीब 200 लोगों ने थाने में घुसकर तोड़फोड़ की। टीआई को दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। पत्थरबाजी हुई। इसमें 12 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।बुधवार को गांव में बाजार रोजाना की तरह खुला है। सुरक्षा के लिए इलाका छावनी बना है। चार थानों के 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं। हर चौराहे पर दो-दो पुलिसकर्मी डटे हैं। वज्र वाहन, आंसू गैस और फायर ब्रिगेड भी तैनात है।चार लोगों को इकट्ठा नहीं होने दिया जा रहा। हालांकि हालात सामान्य हैं। गांव की आबादी करीब 10 हजार है। इनमें ठाकुर, बनिया और ब्राह्मण ज्यादा हैं। करीब तीन हजार दलित, बाकी ओबीसी हैं।
बजरंग दल के लोग मुझे मार देते, TI ने बचाया
हिंसा को लेकर दलित नेता रानी वर्मा ने कहा कि यह बजरंग दल की साजिश थी। मुझे कह रहे थे कि ये बहुत बड़ी अंबेडकर वादी बनती है। इसे यहीं खत्म करो। इसकी राजनीति खत्म हो जाएगी। बाबा साहब की दीवानी बनी फिरती है। घटना के बाद दैनिक भास्कर ने जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर मौके पर पहुंचकर प्रत्यक्षदर्शियों, पुलिस और दलित नेता से बात की। यह जानने की कोशिश की कि विवाद कैसे हुआ और कितने लोग घायल हुए।
कैसे शुरू हुआ विवाद
14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती पर सुबह 11:30 बजे भीम आर्मी के कार्यकर्ता रैली निकाल रहे थे। इसमें 400 से ज्यादा लोग शामिल थे। सड़क किनारे खड़ी बोलेरो में कोदौरा गांव के मनीष तिवारी और मनी शुक्ला बैठे थे। वे किसी काम से आए थे। रैली में कुछ लोगों ने गाड़ी हटाने को कहा। दोनों के बीच कहासुनी हुई। विवाद बढ़ा तो रैली में मौजूद लोगों ने उन्हें पीटना शुरू किया। गाड़ी के कांच तोड़ दिए। दोनों को बाहर निकालकर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से सड़क पर पटककर पीटा।
एक शख्स घर के सामने बेहोश होकर गिर गया, फिर भी लोग उसे पीटते रहे। दूसरा मनी शुक्ला बचने के लिए एक घर में घुसा, तो भीड़ ने घर में घुसकर घरवालों और मनी को भी पीटा। दोनों को गंभीर हालत में रीवा मेडिकल अस्पताल रेफर किया गया है।