शिवपुरी। 
मध्य प्रदेश के चंबल में एक बार फिर सत्ता की कड़ी जंग देखने को मिल रही है. यह मामला भले ही एक नगर पालिका का है, लेकिन पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है. दरअसल, शिवपुरी नगर पालिका परिषद में मौजूदा अध्यक्ष को हटाने के लिए 39 में से 22 पार्षदों ने मोर्चा खोल दिया है. इन पार्षदों ने शिवपुरी जिले के प्रसिद्ध हनुमान मंदिर में जाकर अध्यक्ष को हटाने की शपथ ली है. मान्यता है कि इस मंदिर में जो कसम खाता है तो उसे पूरा करना पड़ता है, अगर वह कसम तोड़ता है तो उसे कोढ़ हो जाता है, वहीं बताया जा रहा है कि बीजेपी ने अपने मौजूदा नगर पालिका अध्यक्ष को बचाने की तैयारी कर ली है, ऐसे में पार्षदों का कहना है कि अगर वह बच गए तो हमें कोढ़ होने से कौन बचाएगा. 
ज्योतिरादित्य सिंधिया के क्षेत्र में सत्ता की जंग 
मामला 11 जून का बताया जा रहा है शिवपुरी नगर पालिका के 22 पार्षदों ने मौजूदा अध्यक्ष को हटाने के लिए कसम खाई थी, जबकि हटा न पाने की स्थिति में खुद इस्तीफा देने की कसम भी ली थी. शिवपुरी केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का संसदीय क्षेत्र हैं, ऐसे में उन्होंने शिवपुरी के भाजपा जिला अध्यक्ष जसमंत जाटव के साथ प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को नाराज पार्षदों को मनाने के लिए भेजा था. लेकिन पार्षद अपनी बात पर अड़े हुए हैं. इस बीच 22 पार्षदों ने शिवपुरी के कलेक्टर रवींद्र चौधरी को नगर पालिका अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास का आवेदन भी दिया था. जिसके बाद कलेक्टर ने अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन की सुनवाई के लिए 25 अगस्त की समय सीमा तय की है, जिसके बाद भाजपा संगठन भी सक्रिए हो गया है. 
शिवपुरी में खेला शुरू 
अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन की तारीख शुरू होते ही सत्ता का खेल शुरू हो गया है. बीजेपी के जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने भाजपा के सभी पार्षदों को निर्देश दिए हैं कि वह अविश्वास का आवेदन वापस लें. जबकि चर्चा यह भी चल रही है कि शिवपुरी नपाध्यक्ष के गुट ने पार्षदों की लामबंदी भी शुरू कर दी है, पार्षदों की खरीद-फरोख्त की बातें भी सामने आ रही है, ताकि बहुमत जुटाया जा सके. वहीं बीजेपी संगठन भी इस मामले में लगातार सक्रिए बना हुआ है. 
शिवपुरी नगर पालिका का गणित 
बात अगर शिवपुरी नगर पालिका के गणित की जाए तो यहां कुल 39 वार्ड हैं, मौजूदा स्थिति में बीजेपी के 23, कांग्रेस के 9 और 7 पार्षद निर्दलीय हैं. जिसमें सभी 7 निर्दलीय पार्षद पहले ही बीजेपी को समर्थन दे चुके हैं, हालांकि ज्यादातर निर्दलीय पार्षद भी नपाध्यक्ष के खिलाफ हैं, लेकिन उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर वोट करने के दौरान बीजेपी को समर्थन की बात तो कही है. वहीं शिवपुरी की मौजूदा नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा के समर्थन वाले पार्षदों का कहना है कि उनके पास पर्याप्त बहुमत है, केवल राजनीति की जा रही है. विरोध कर रहे पार्षदों का कहना है कि उन्हें पद का लालच नहीं है, लेकिन मौजूदा अध्यक्ष से स्थिति अच्छी नहीं है. इसलिए ज्योतिरादित्य सिंधिया जिसे तय करेंगे उसे हम सब वोट करेंगे. लेकिन वर्तमान अध्यक्ष स्वीकार नहीं हैं. 
कसम टूटने का डर 
बताया जा रहा है कि जिन पार्षदों ने मौजूदा नगर पालिका अध्यक्ष को हटाने की कसम खाई है, उन्होंने कसम टूटने की स्थिति में इस्तीफे लिखने शुरू कर दिए हैं. कई पार्षदों का कहना है कि अब पीछे हटने का सवाल नहीं है. बागी पार्षदों ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ हुई बैठक में भी यह कह दिया है कि आप जिसे तय करेंगे उसे वोट करेंगे, लेकिन अब कसम नहीं तोड़ सकते हैं. क्योंकि जिस मंदिर में शपथ ली है वहां की शपथ तोड़ी नहीं जाती. क्योंकि हनुमान मंदिर की महिमा अलग है, इसलिए  सौगंध टूटी तो कोढ़ हो जाएगा. बागी पार्षदों का कहना है कि जब मंदिर में शपथ ले रहे थे, तब मंदिर के पुजारी ने भी कहा था कि आप लोग सोच लीजिए सौगंध ले तो रहे हैं, लेकिन अगर सौंगध तोड़ी तो कोढ़ रोग हो जाएगा. अब कोई यह बात माने न या माने लेकिन हम भरोसा करते हैं. 
चर्चा में शिवपुरी नगर पालिका 
बताया जा रहा है कि केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की भी पार्षदों के साथ हुई बैठक बेनतीजा रही थी, लेकिन अभी अविश्वास प्रस्ताव में दो दिन का समय बचा है, ऐसे में कोशिश जारी है. लेकिन इस पूरे मामले से शिवपुरी नगर पालिका पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है. बता दें कि मध्य प्रदेश में पहले नगर पालिका-परिषद अध्यक्ष के खिलाफ 2 साल में ही अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रावधान था, लेकिन सरकार ने कानून में संसोधन करते हुए इसे 3 साल कर दिया था. जिससे पिछले साल तो अध्यक्ष की कुर्सी बच गई, लेकिन जैसे ही 3 साल पूरे हुए तो पार्षद फिर से लामबंद हो गए हैं.