शिवपुरी। 
शिवपुरी नगर पालिका परिषद का तीन साल का कार्यकाल पूरा होते ही 39 में से 22 पार्षदों ने बगीचा सरकार में जाकर अध्यक्ष को हटाने की कसम खा ली है। बगीचा सरकार करैरा कस्बे का प्रसिद्ध हनुमान मंदिर है। मान्यता है कि जो कसम यहां खाई जाए, उसे पूरा जरूर करना पड़ता है वर्ना व्यक्ति को कोढ़ हो जाता है। भाजपा ने इस बीच नपाध्यक्ष को बचाने की पूरी तैयारी कर ली। कसम खाने वाले पार्षद अब कह रहे हैं कि अध्यक्ष भले ही जाए या बच भी जाए, लेकिन हमें कोढ़ होने से कौन बचाएगा । दरअसल, 11 जून को शिवपुरी नगर पालिका के 22 पार्षदों ने बगीचा सरकार जाकर नपाध्यक्ष को हटाने और न हटा पाने की स्थिति में खुद इस्तीफा देने की कसम खाई थी। इस बीच केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, भाजपा जिला अध्यक्ष जसमंत जाटव और प्रभारी मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने नाराज पार्षदों को मनाने के तमाम प्रयास किए, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला।
22 पार्षदों ने कलेक्टर को दिया अविश्वास का आवेदन
22 पार्षदों ने कलेक्टर रवींद्र चौधरी को अविश्वास का आवेदन दे दिया। कलेक्टर ने अविश्वास प्रस्ताव के आवेदन की सुनवाई के लिए 25 अगस्त की तारीख तय की है। जैसे ही कलेक्टर का नोटिस जारी हुआ, वैसे ही भाजपा संगठन सक्रिय हो गया।भाजपा जिलाध्यक्ष जसमंत जाटव ने 21 अगस्त को नपाध्यक्ष का विरोध कर रहे पार्षदों से अविश्वास का आवेदन वापस लेने को कहा। इसी बीच नपाध्यक्ष गुट और उनके खिलाफ लामबंद पार्षदों के बीच बहुमत जुटाने का खेल शुरू हो गया है। पार्षदों की खरीद-फरोख्त की चर्चाएं भी सामने आईं।
पार्षद बोले- सिंधिया जिसे कहेंगे उसे नपाध्यक्ष मान लेंगे
शिवपुरी नपा में भाजपा के 23, कांग्रेस के 9 और 7 निर्दलीय पार्षद हैं। इनमें निर्दलीय पहले ही भाजपा को अपना समर्थन दे चुके हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर नपाध्यक्ष के खिलाफ हैं। नपाध्यक्ष गायत्री शर्मा के खेमे वाले पार्षदों का कहना है कि बहुमत हमारे साथ है, सिर्फ राजनीति हो रही है। वहीं, विरोध कर रहे पार्षदों ने कहा कि किसी को नपाध्यक्ष बनने का लालच नहीं है। सिंधिया जिसे तय कर देंगे, हम सब उसका साथ देंगे। हमें गायत्री शर्मा नगर पालिका अध्यक्ष के तौर पर स्वीकार नहीं हैं।