सिवनी। 
प्रदेश में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका जीता-जागता उदाहरण सिवनी जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में देखने को मिला है। यहाँ तत्कालीन सहायक आयुक्त अमर सिंह उइके पर नियमों को ताक पर रखकर 150 से अधिक अवैध भर्तियां करने का गंभीर आरोप लगा है।
घोटाले का गणित: क्या-क्या हुआ?
कलेक्टर की 15 पन्नों की जांच रिपोर्ट (ADM की अध्यक्षता वाली कमेटी) ने ऐसे खुलासे किए हैं जो होश उड़ा देंगे: 120+ दैनिक वेतन भोगी: बिना किसी अधिकार के अवैध रूप से भर्ती किए गए। 30 स्थाई कर्मी: नियमों के विरुद्ध दैनिक वेतन भोगियों को स्थाई किया गया।60+ अनुकंपा नियुक्तियां: जिले से बाहर के लोगों को और वहां भी नियुक्तियां दी गईं जहां पद खाली ही नहीं थे। कूटरचित दस्तावेज: जांच रिपोर्ट में 'स्कैन किए हुए आदेश', 'कूटरचित जावक नंबर' और 'छद्म दस्तावेजों' का बार-बार उल्लेख है।
फाइलों का 'गायब' होना और भोपाल का 'मौन'
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कलेक्टर की सिफारिश और जांच रिपोर्ट भोपाल मुख्यालय भेजे हुए एक साल से ज्यादा बीत चुका है, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ये अवैध कर्मचारी आज भी सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये का वेतन निकाल रहे हैं। जांच कमेटी को बहुत सी नियुक्तियों की मूल फाइलें उपलब्ध ही नहीं कराई गईं। विभाग ने कार्रवाई के नाम पर वर्तमान अधिकारी को नोटिस थमा दिया, जबकि घोटाले के समय पदस्थ अधिकारी कोई और था।
कौन है घोटाले का मास्टरमाइंड?
घोटाले का मुख्य आरोपी अमर सिंह उइके पूर्व में डिंडोरी में हुए छात्रवृत्ति घोटाले में 11 महीने जेल काट चुका है। जेल से छूटने के बाद उसे फिर सिवनी में बड़ी जिम्मेदारी दी गई, जहाँ उसने फिर से 'नियुक्ति घोटाला' कर डाला। वर्तमान में वह सस्पेंड है, लेकिन उसके द्वारा की गई अवैध नियुक्तियां अब भी बरकरार हैं।
अब कोर्ट की शरण में जाएंगे शिकायतकर्ता
इस घोटाले का भंडाफोड़ करने वाले पत्रकार दिनेश ठाकुर और उनके साथियों का कहना है कि विभाग और सरकार इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। अब यह मामला मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (High Court) ले जाया जाएगा ताकि इन अवैध नियुक्तियों को रद्द किया जा सके और दोषियों को सजा मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह से जनता पूछ रही है— "जब कलेक्टर की रिपोर्ट में दोष सिद्ध हो चुका है, तो कार्रवाई किसके दबाव में रुकी है? सरकारी खजाने को करोड़ों की चपत लगाने वालों पर एफआईआर कब होगी?"