भोपाल, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सटे सीहोर जिले में 'जय श्री फूड प्रोडक्ट्स' (अब हेल्थ ब्रिज एग्रो) के नाम पर चल रहे एक बड़े मिलावटखोरी के साम्राज्य का पर्दाफाश हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा फैक्ट्री मालिक किशन मोदी की गिरफ्तारी के बाद यह साफ हो गया है कि विकास और शुद्धता के नाम पर करोड़ों लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा था। वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र जैन और सामाजिक कार्यकर्ता भगवान सिंह राजपूत के बीच हुए पॉडकॉस्ट में यह तथ्य सामने आया कि साल 2013 से संचालित इस फैक्ट्री में पनीर, घी, दही और चीज जैसे उत्पादों में पाम ऑयल और जानलेवा केमिकल्स की मिलावट की जा रही थी।
अमेरिका तक जाता था यह "जहर" 
हैरानी की बात यह है कि इन मिलावटी उत्पादों को न केवल भारत के बाजारों में खपाया गया, बल्कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे यूरोप, अमेरिका और खाड़ी देशों तक निर्यात किया गया। भगवान सिंह राजपूत के अनुसार, आरोपियों ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) मुंबई की जाली रेडियोएक्टिविटी टेस्ट रिपोर्ट और नकली लैब सर्टिफिकेट तैयार किए थे ताकि उनके जहरीले उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरी झंडी मिल सके। इस पूरे खेल में करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग और बैंक धोखाधड़ी के भी पुख्ता सबूत मिले हैं।
13 साल तक चलता रहा काला कारोबार 
इस मामले ने सीहोर के प्रशासनिक अमले और दिग्गज राजनेताओं की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा बिजली काटने के आदेश और किसानों की लगातार शिकायतों के बावजूद जिला प्रशासन ने अपनी आंखें मूंदे रखीं। जब मुख्य फैक्ट्री का कनेक्शन काटा गया, तो परिसर के अंदर ही 'अनवी फूड्स' जैसी दूसरी कंपनी के नाम पर अवैध रूप से काम जारी रखा गया। राजधानी के इतने करीब 13 साल तक यह काला कारोबार बिना किसी बड़े अवरोध के चलता रहा, जो सीधे तौर पर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण की ओर इशारा करता है। इस पूरे घोटाले को उजागर करने वाले भगवान सिंह राजपूत, जो स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं, उन्हें इस सच्चाई को सामने लाने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ी। साल 2022 से चल रही इस कानूनी लड़ाई के दौरान उन्हें जान से मारने की धमकियां मिलीं और उन पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उनका जीवन बर्बाद करने की कोशिश की गई। उन्होंने खुलासा किया कि 31 जनवरी 2025 को जब ईडी ने पहली बार दबिश दी थी, तब गिरफ्तारी से बचने के लिए मालिक की पत्नी ने जहर पीने का नाटक कर जांच को भटकाने का प्रयास किया था।
 मिलावटखोरी नहीं यह एक 'नरसंहार' है...
वर्तमान में किशन मोदी ईडी की हिरासत में है और जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है। भगवान सिंह राजपूत अब इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुके हैं, जहां उन्होंने हाई कोर्ट के पुराने आदेशों को चुनौती दी है। उनका कहना है कि यह केवल मिलावटखोरी नहीं बल्कि एक 'नरसंहार' है, क्योंकि यह उत्पाद बच्चों और बीमार बुजुर्गों तक पोषण के नाम पर पहुँचाए गए, जो वास्तव में उन्हें कैंसर और हृदय रोगों जैसी गंभीर बीमारियों की ओर धकेल रहे थे। यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और दोषियों को फांसी जैसी कड़ी सजा देने की मांग उठ रही है।