सतना।
मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं में लापरवाही का एक और डरावना चेहरा सामने आया है। जबलपुर के विक्टोरिया अस्पताल के बाद अब सतना जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल सरदार वल्लभ भाई पटेल जिला चिकित्सालय के सबसे संवेदनशील वार्ड 'एसएनसीयू' में चूहों की फौज का कब्जा हो गया है।
यहां जिंदगी और मौत से जूझ रहे 40 नवजात बच्चे भर्ती हैं। उनके बीच चूहे बेखौफ दौड़ लगा रहे हैं। इस लापरवाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने अस्पताल प्रबंधन की नींद उड़ा दी है।एक चूहा अपने मुंह में 'मुंगौड़ी' दबाए हुए कंप्यूटर मॉनीटर के नीचे से निकलता है और वाई-फाई राउटर के ऊपर से भागता है। थोड़ी देर में लोगों की आहट सुनने के बाद वहीं मुंगौड़ी छोड़कर भाग जाता है। वहीं, इनबॉर्न यूनिट से भी दो चूहे एक-दूसरे के पीछे दौड़ते नजर आ रहे हैं।
इंदौर जैसी अनहोनी का डर
यह वीडियो इसलिए डराने वाला है क्योंकि इसी साल अगस्त-सितंबर में इंदौर के एमवाईएच अस्पताल में चूहों ने दो नवजात बच्चों को कुतर दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई थी। अब सतना में भी वही खतरा मंडरा रहा है। एसएनसीयू में वे बच्चे भर्ती होते हैं जो प्री-टर्म (समय से पहले) जन्मे हों, सांस लेने में दिक्कत हो या गंभीर संक्रमण का शिकार हों।
पेस्ट कंट्रोल फेल, अंदर हो रही 'दावत'
अस्पताल प्रबंधन दावा करता है कि वार्डों में 'रैट ट्रैप' लगाए गए हैं और समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल होता है। वायरल वीडियो ने इन दावों की पोल खोल दी है। एसएनसीयू जैसे प्रतिबंधित और हाइजीनिक वार्ड में 'मुंगौड़ी' का मिलना यह साबित करता है कि स्टाफ अंदर ही नाश्ता-पानी करता है। खाने के टुकड़े गिरने की वजह से ही चूहे वहां तक पहुंच रहे हैं।
2009 में बना था यह स्पेशल वार्ड
सतना जिला अस्पताल में नवजातों को बेहतर इलाज देने के लिए वर्ष 2009 में इस यूनिट का निर्माण हुआ था। यहां इनबॉर्न, आउटबॉर्न और एचडीयू यूनिट हैं। लेकिन सफाई और सुरक्षा में चूक के कारण अब यह जीवन रक्षक वार्ड चूहों का अड्डा बन गया है।