सागर का बरौदिया नौनागिर कांड: खाकी और सियासत के गठजोड़ पर भारी पड़ा एक दलित परिवार का हौसला, अब CBI करेगी इंसाफ!
सागर/खुरई।
मध्य प्रदेश के सागर जिले का बरौदिया नौनागिर गांव आज एक ऐसे खौफनाक अध्याय का गवाह बन चुका है, जिसने लोकतंत्र और कानून व्यवस्था को शर्मसार कर दिया है। एक के बाद एक परिवार के तीन सदस्यों की जान चली गई, लेकिन एक गरीब दलित परिवार ने सत्ता और रसूख के सामने घुटने नहीं टेके। अब इस मामले में CBI (सीबीआई) ने खुरई में डेरा डाल दिया है। मौत के उस मंजर का 'रिक्रिएशन' किया जा रहा है जिसे पुलिस 'हादसा' बता रही थी। क्या पूर्व गृह मंत्री पर लगे आरोपों की आंच अब उन तक पहुंचेगी? क्या सीबीआई असली गुनहगारों के गिरेबान तक पहुंच पाएगी?
तीन मौतें और एक अटूट संघर्ष:
यह कहानी शुरू हुई थी 2019 में एक मामूली मारपीट से, जो धीरे-धीरे एक सोची-समझी साजिश में बदल गई। पहले बेटे नितिन की पीट-पीटकर हत्या हुई, फिर चाचा राजेंद्र को कुल्हाड़ी से काट दिया गया और अंत में मुख्य गवाह बेटी अंजना अहिरवार की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
CBI का सीन रिक्रिएशन: क्या छिपा रही थी पुलिस?
सीबीआई ने खुरई में भारी बैरिकेडिंग के बीच उस एंबुलेंस कांड का रिक्रिएशन किया, जिसमें अंजना की जान गई थी। पुलिस का दावा था कि वह एंबुलेंस से गिर गई, लेकिन पोस्टमार्टम में आए 14 घाव कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। सीबीआई यह तकनीकी जांच कर रही है कि क्या गिरने से इतने जख्म मुमकिन हैं या यह हत्या थी।
पूर्व गृह मंत्री पर संगीन आरोप:
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान पीड़ित परिवार (बड़ी बहू) ने सीधा आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह ने आरोपियों को राजनीतिक संरक्षण दिया है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एमके सिंह ने राज्य सरकार की दलीलों को दरकिनार करते हुए जांच सीबीआई को सौंपी है।
सियासी मोड़: दिग्विजय सिंह ने थामा हाथ:
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस परिवार को गोद लिया है। उन्होंने साफ कहा है कि वह इस अन्याय के खिलाफ आखिरी सांस तक लड़ेंगे। परिवार का कहना है कि उन्हें बार-बार समझौते के लिए धमकाया गया, भाई का 'जिला बदर' तक कराया गया, लेकिन वे नहीं झुके।
बरौदिया नौनागिर का यह मामला अब केवल एक आपराधिक केस नहीं रह गया है, बल्कि यह रसूख बनाम न्याय की जंग बन चुका है। सीबीआई की जांच रिपोर्ट एक महीने के भीतर सुप्रीम कोर्ट में पेश होनी है। अब पूरे मध्य प्रदेश की निगाहें इस पर टिकी हैं कि क्या खाकी और खादी के संरक्षण में पल रहे अपराधी सलाखों के पीछे जाएंगे?

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