CBI जांच और सीएम की बेरुखी ने बिगाड़ा भूपेंद्र सिंह सियासी समीकरण, क्या ढल रहा है खुरई के 'सूरज' का इकबाल ?
भोपाल, सबकी खबर।
सूबे की राजनीति में एक समय इनकी तूती बोलती थी। पूरे प्रदेश में एक दबदबा था शिवराज सिंह के समय इनकी तो बात ही अलग थी। जी हां हम बात कर रहे हें पूर्व गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह की जिनके लिए आने वाला समय बड़ी चुनौतियां लेकर आ रहा है। कभी सत्ता के केंद्र में रहने वाले भूपेंद्र सिंह अब कानूनी पचड़ों और राजनीतिक अलगाव के बीच घिरते नजर आ रहे हैं। उनके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दो बड़े मामलों में आदेश हो चुके हैं। बड़ौदिया नौनागीर में हुए दलित हत्याकांड की जांच अब सीबीआई के पास है, वहीं नीलेश आदिवासी आत्महत्या मामले में एसआईटी को अपनी रिपोर्ट पेश करनी है। इसके अलावा उनके भतीजे के क्रेशर पर एक बच्चे को करंट लगने और पूर्व समर्थक रानू जैन के साथ हुए विवाद ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
इतना खराब समय कि सीएम ने भी बना ली दूरी...
सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भूपेंद्र सिंह से एक दूरी बना ली है। सिंह ने सागर में बड़ा मंदिर बनवाया और मुख्यमंत्री को न्योता दिया, लेकिन मुख्यमंत्री वहां नहीं गए, जबकि उन्होंने दूसरे नेताओं के कार्यक्रमों में शिरकत की। यह एक साफ संकेत माना जा रहा है कि अब मध्य प्रदेश की राजनीति में पहले जैसे हालात नहीं रहे। खुरई विधानसभा में भी उनकी कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं, जहां आरोप है कि राजनीति केवल समर्थकों और विरोधियों के बीच सिमट गई है और विरोधियों पर झूठे मुकदमे लादे जा रहे हैं।
परिवार से दूरी बनाने के खोखले दावे की भी निकली हवा
पारिवारिक सदस्यों के अवैध शराब कारोबार में नाम आने पर भूपेंद्र सिंह ने सार्वजनिक रूप से उनसे दूरी बनाने का दावा तो किया, लेकिन जनता इसे महज एक कागजी औपचारिकता मान रही है। जानकारों का कहना है कि शिवराज सिंह चौहान के दौर में उन्हें जो खुली छूट मिली थी, वह अब खत्म हो चुकी है। अब यदि उन्हें अपनी साख वापस पानी है, तो उन्हें जमीनी हकीकत को समझना होगा और अपनी कार्यशैली में बड़ा बदलाव करना होगा, वरना मंत्रिमंडल विस्तार की दौड़ में भी वे पिछड़ सकते हैं।

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