रीवा सांसद का नया 'इतिहास ज्ञान': बोले- देश 1947 में नहीं, 1952 में आजाद हुआ!
रीवा।
देश कब आजाद हुआ था? अगर आप सामान्य ज्ञान की किसी किताब में पढ़ेंगे या किसी बच्चे से भी पूछेंगे, तो जवाब मिलेगा— 15 अगस्त 1947। लेकिन रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा के मुताबिक भारत को आजादी साल 1952 में मिली थी। भले ही इसे सांसद महोदय की 'जुबान फिसलना' कहा जाए, लेकिन उनके इस नए इतिहास ज्ञान ने सोशल मीडिया पर सियासी पारा गरमा दिया है और लोग जमकर चुटकियां ले रहे हैं।
मोदी जी से थोड़ा पीछे, 1947 से बहुत आगे!
वैसे तो भाजपा के कई बड़े नेता और फिल्म स्टार्स अक्सर यह दावा करते सुने जाते हैं कि देश को 'असली आजादी' साल 2014 में मिली है, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। इस मामले में रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा कम से कम 2014 से थोड़ा पीछे तो लौटे, लेकिन इतिहास की पटरी पर दौड़ते-दौड़ते वह 1947 के स्टेशन पर रुकना भूल गए और सीधे 1952 पर जाकर ब्रेक लगाया।
रेलवे के सवाल पर फिसली जुबान, फिर पत्रकारों पर फूटा गुस्सा
दरअसल, पूरा मामला रीवा-मिर्जापुर रेल लाइन से जुड़ा है। मीडिया ने जब सांसद जी से सवाल किया कि आखिर इस रूट पर ट्रेन कब तक शुरू होगी? इस पर सांसद महोदय काम गिनाने के मूड में आ गए। उन्होंने कहा, "यह मांग तो आजादी के समय से चली आ रही है, जब 1952 में देश आजाद हुआ..."। उन्होंने दावा भी ठोक दिया कि उनके प्रयासों से इस रेल लाइन का सर्वे पूरा हो चुका है। ट्रेन तो सालों से सर्वे और मांगों के बीच ही अटकी है, इसलिए जब पत्रकारों ने इस लेटलतीफी को लेकर तीखे सवाल दागने शुरू किए, तो सांसद जी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। वह गुस्से में पत्रकारों से ही कह बैठे— "आप लोग फालतू बात करते हो।"
ट्रेन चले न चले, सांसद जी का बयान जरूर हुआ 'सुपरफास्ट'
रीवा-मिर्जापुर रेल लाइन पर ट्रेन कब दौड़ेगी, यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन सांसद जनार्दन मिश्रा का यह '1952 वाला आजादी का फॉर्मूला' सोशल मीडिया की पटरी पर 'सुपरफास्ट एक्सप्रेस' की तरह दौड़ रहा है। विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा मिल गया है और लोग कह रहे हैं कि सांसद जी ने इतिहास का भूगोल ही बदल दिया!

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