राजगढ़। 
राजनीति में जोश और होश का संतुलन बहुत जरूरी है, लेकिन कभी-कभी जोश इतना हावी हो जाता है कि नेताजी 'नादानी' कर बैठते हैं। ताजा मामला राजगढ़ का है, जहां जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सौंधिया ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की डॉक्टरी डिग्री पर ऐसा सवाल उठाया कि अब वे खुद ही ट्रोलर्स के निशाने पर आ गए हैं।
"क्या कभी भैंस को इंजेक्शन लगाया है?" सरकार को घेरने के चक्कर में सौंधिया जी मर्यादा और जानकारी दोनों भूल गए। एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने तंज कसा— "मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने नाम के आगे 'डॉक्टर' लगाते हैं, लेकिन क्या उन्होंने कभी किसी को इंजेक्शन लगाया है? क्या कभी किसी का बुखार उतारा है या किसी मरीज को दवा दी है?" इतना ही नहीं, उन्होंने प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल को भी लपेटे में लेते हुए कहा— "इन्होंने तो कभी भैंस को भी पेट दर्द की गोली या इंजेक्शन नहीं लगाया, फिर ये काहे के डॉक्टर?"
पीएचडी और एमबीबीएस का अंतर भूले नेताजी
नेताजी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर उनकी 'ज्ञान की कमी' का खूब मजाक उड़ रहा है। लोगों ने उन्हें याद दिलाया कि हर डॉक्टर अस्पताल में बैठने वाला 'वैद्य' नहीं होता। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास पीएचडी (PhD) की उपाधि है। शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोच्च शोध कार्य करने वालों को सम्मान के तौर पर 'डॉक्टर' की उपाधि दी जाती है।
पब्लिक है सब जानती है...
राजगढ़ के सियासी गलियारों में अब चर्चा है कि या तो सौंधिया जी को पीएचडी और एमबीबीएस के बीच का अंतर नहीं पता, या फिर वे जनता को भोला समझकर गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। खैर, वजह जो भी हो, नेताजी के इस 'डॉक्टरी ज्ञान' ने कांग्रेस को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोग उन्हें नसीहत दे रहे हैं कि सरकार की आलोचना करने से पहले थोड़ा होमवर्क कर लेना चाहिए। कांग्रेस नेता ने सीएम की शैक्षणिक डिग्री को 'मेडिकल प्रैक्टिस' समझकर मजाक उड़ाया, जो अब उनके खुद के लिए मजाक का विषय बन गया है।