राघौगढ़। 
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के बेटे और राघौगढ़ से कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह इन दिनों किसी राजनीतिक उलझन में नहीं, बल्कि एक मासूम बच्ची की कड़क पहेली में उलझ गए हैं। इस पहेली ने विधायक जी के दिमाग के घोड़े दौड़ा दिए हैं और आखिरकार उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जनता से मदद की गुहार लगाई है। दरअसल, राघौगढ़ दौरे के दौरान पायल नाम की एक स्थानीय बच्ची ने जयवर्धन सिंह को मिट्टी का एक छोटा सा घड़ा भेंट किया, जिसे उसने ‘बुद्धि का घड़ा’ नाम दिया। इस घड़े की बड़ी खासियत यह है कि इसके अंदर एक बड़ा सा साबुत कद्दू रखा हुआ है। बच्ची ने विधायक के सामने शर्त रखी है कि बिना घड़ा फोड़े और बिना कद्दू को काटे या नुकसान पहुँचाए, इसे बाहर निकालना है।
मैं भी विचार कर रहा हूँ और आप भी विचार करें...
शर्त सुनते ही जयवर्धन सिंह कुछ पल के लिए गंभीर हो गए और समाधान सोचने लगे। जब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझा, तो उन्होंने हंसते हुए बच्ची से ही पूछ लिया कि पायल, इसका कोई तरीका है क्या? अगर है तो मुझे चुपके से बता दो। लेकिन बच्ची भी अपनी बात पर अड़ी रही और उसने मुस्कुराते हुए साफ मना कर दिया, जिसे सुनकर वहां मौजूद सभी लोग ठहाके लगाकर हंस पड़े। जब काफी देर तक कोई हल नहीं निकला, तो जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर इस अनोखे घड़े की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि इस पहेली को हल करने के लिए मैं भी विचार कर रहा हूँ और आप भी विचार करें। जो भी व्यक्ति इसका सही तरीका बताएगा, उसे पायल और मेरी ओर से एक विशेष तोहफा दिया जाएगा।
विधायक जी, कद्दू का घड़े के अंदर ही हलवा बना दीजिए...
विधायक की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर पहेली सुलझाने की होड़ मच गई है। लोग तरह-तरह के वैज्ञानिक और मजाकिया सुझाव दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि इस कद्दू को घड़े के अंदर तब बड़ा किया गया होगा जब वह बेल पर एक छोटा सा फूल या फल रहा होगा, इसलिए अब इसे बिना तोड़े निकालना असंभव है। वहीं कुछ यूजर्स ने मजाकिया अंदाज में सलाह दी कि विधायक जी, कद्दू का घड़े के अंदर ही हलवा बना दीजिए और फिर चम्मच से बाहर निकाल लीजिए। राजनीति के जानकारों का कहना है कि आज के दौर में जब नेता जनता के बीच जाकर ऐसे हल्के-फुल्के पलों का हिस्सा बनते हैं, तो वे सीधे आम लोगों के दिलों से जुड़ जाते हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि सोशल मीडिया की मदद से जयवर्धन सिंह इस ‘बुद्धि के घड़े’ की पहेली सुलझा पाते हैं या नहीं।