नरसिंहपुर। 
नरसिंहपुर के आनंद नगर में रहने वाली ओसवाल फैमिली की इन दिनों चर्चा है। वजह है कि परिवार की छोटी बेटी अनामिका ने अपने पति और दोनों बच्चों के साथ सांसारिक जीवन त्यागकर जैन संत बनने का फैसला लिया है। जैन संत बनने की रस्म के तहत वे अपने भाइयों से मिलने नरसिंहपुर आईं। रिश्तेदार के रूप में आखिरी मुलाकात के बाद वे परिवार समेत गुजरात के तीर्थ पालिताना (भावनगर) रवाना हो गईं। यहां 16 जनवरी 2026 को बिजनेसमैन दिनेश कांकरिया, अपनी पत्नी अनामिका, बेटा विधान और बेटी हर्षिता के साथ संत की दीक्षा लेंगे।
15 जनवरी के बाद बहन नहीं कह सकेंगे
अतुल कहते हैं कि 15 जनवरी 2026 तक वे हमारे परिवार का हिस्सा रहेंगे। इस दौरान वे सभी नाते-रिश्तेदारों के यहां जाकर घूमेंगे-फिरेंगे। 16 जनवरी 2026 को जब उनकी दीक्षा हो जाएगी तो वे हमारे लिए ही साध्वी और संत हो जाएंगे, तब हम भी उन्हें अपनी बहन नहीं कह सकते। जैसे वो दूसरे लोगों के लिए रहेंगे, वैसे ही हमारे लिए। हम लोग श्वेताबंर जैन हैं। हमारे समाज में परंपरा है कि संत दीक्षा लेने से पहले कुछ संकल्प पूरे करने होते हैं। इसके लिए अनामिका अपने परिवार समेत महाराष्ट्र से श्री मुनिसुव्रत स्वामी जैन श्वेतांबर मंदिर में दीक्षार्थी अभिनंदन समारोह में आई थीं।
ऐसे आया वैराग्य का भाव
अनामिका बताती हैं कि समय और परिस्थितियों ने गृहस्थ जीवन में बांध रखा था। किसी विशेष टर्निंग पॉइंट के बजाय यह दृढ़ इच्छाशक्ति व पति बच्चों और परिवार की सहमति का परिणाम है। उनका कहना है कि हमने महसूस किया कि जीवन सिर्फ भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मिक शांति और सत्य की प्राप्ति ही सर्वोच्च लक्ष्य है।