विधायक जी को 'गांव चलना' पड़ा भारी! ग्रामीणों ने घेरा तो बिगड़े बोल— बोले: "अब आप विरोध ही कर लो"
नर्मदापुरम (पिपरिया)।
भारतीय जनता पार्टी का महत्वाकांक्षी ‘गांव चलो, बस्ती चलो’ अभियान धरातल पर अब नेताओं के लिए अग्निपरीक्षा साबित हो रहा है। ताजा मामला पिपरिया विधानसभा का है, जहाँ विकास के दावों की पोल खुद जनता ने खोल दी। जब भाजपा विधायक ठाकुरदास नागवंशी तामझाम के साथ गांव पहुंचे, तो उन्हें फूल-मालाओं के बजाय ग्रामीणों के तीखे सवालों और भारी आक्रोश का सामना करना पड़ा।
जब 'जनार्दन' ने मांगा हिसाब
पिपरिया के एक गांव में जैसे ही विधायक नागवंशी की गाड़ी रुकी, बुनियादी सुविधाओं से वंचित ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। कीचड़ से सनी गलियां, सूखी नल-जल योजना और बदहाल सड़कों को लेकर लोगों ने विधायक को चारों तरफ से घेर लिया। ग्रामीणों ने दो टूक सवाल किया— "जब वोट लेकर आप विधानसभा पहुंचे, तो पांच सालों में हमारी नाली और सड़क की सुध क्यों नहीं ली?"
गुस्से में आपा खो बैठे माननीय
आमतौर पर जनता को समझाने और आश्वासन देने वाले माननीय इस बार ग्रामीणों के तेवर देखकर खुद भी उखड़ गए। जब सवालों की बौछार रुकी नहीं, तो विधायक ठाकुरदास नागवंशी बचाव करने के बजाय नाराज हो गए। उन्होंने खीझते हुए कहा— "अब आप विरोध ही कर लो।" इतना कहकर वे समर्थकों के साथ वहां से रवानगी डालने लगे। हद तो तब हो गई जब विधायक की पत्नी और उनके साथ मौजूद समर्थकों को भी ग्रामीणों के तीखे सवालों का सामना करना पड़ा।
लोकतंत्र में 'फर्श से अर्श' का सबक
इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोर रहा है। लोग चुटकी ले रहे हैं कि एसी कमरों से निकलकर जब नेताजी गांव की कीचड़ और जनता के गुस्से से रूबरू हुए, तो उन्हें हकीकत समझ आ गई। यह घटना उन सभी जनप्रतिनिधियों के लिए एक सबक है जो चुनाव जीतने के बाद जनता को भूल जाते हैं। लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन है; वह अगर अर्श पर बिठाना जानती है, तो वक्त आने पर जमीन दिखाने में भी पीछे नहीं हटती।

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