कानून को ठेंगा! 15 वारंट के बाद भी 'फरार' TI कर रहा नौकरी, प्रमोशन भी मिला; पुलिस को नहीं मिल रहा अपना ही अफसर
मुरैना/छतरपुर।
मध्य प्रदेश में 'कानून के राज' और अपराधियों पर सख्ती के दावों की धज्जियां खुद सूबे का पुलिस महकमा ही उड़ा रहा है। एससी-एसटी (SC-ST Act) जैसे गंभीर मामले में अदालत द्वारा 'फरार' घोषित टीआई (थाना प्रभारी) पुष्पक शर्मा पिछले डेढ़ साल से खुलेआम नौकरी कर रहे हैं। हद तो यह है कि जिस अफसर को ढूंढने में पुलिस की रातें काली हो जानी चाहिए थीं, वह बड़े मजे से विभाग से प्रमोशन (पदोन्नति) भी डकार गया।
विशेष न्यायालय मुरैना इस मामले में अब तक एक-दो नहीं बल्कि पूरे 15 गिरफ्तारी वारंट जारी कर चुका है, लेकिन मुरैना पुलिस आज तक अपने ही भाई-बंधु को गिरफ्तार नहीं कर पाई है।
सिस्टम की अंधेरगर्दी: कोर्ट मान रहा फरार, विभाग दे रहा 'ईनाम'
इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश पुलिस का दोहरा चेहरा और विभागीय सांठगांठ साफ उजागर होती है। विशेष न्यायालय मुरैना ने तत्कालीन सिंहौनिया थाना प्रभारी पुष्पक शर्मा के खिलाफ पहला वारंट काफी पहले जारी किया था। इसके बाद लगातार 15 वारंट जारी हुए, लेकिन पुलिस हर बार 'खाली हाथ' लौट आई।जब मुरैना पुलिस कोर्ट में टीआई को फरार बता रही थी, ठीक उसी दौरान पुष्पक शर्मा छतरपुर जिले के बमीठा और हरपालपुर थानों में मजे से अपनी सेवाएं दे रहे थे। इतना ही नहीं, उन्होंने विभाग की आंखों में धूल झोंककर एसआई (Sub-Inspector) से टीआई (Inspector) के पद पर पदोन्नति भी हासिल कर ली। बीते 5 मई को भी पुलिस आरोपी टीआई को कोर्ट में पेश नहीं कर सकी। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए न्यायालय ने एक बार फिर गिरफ्तारी वारंट जारी कर आरोपी को 7 जुलाई 2026 तक हर हाल में पेश करने का हुक्म दिया है।
क्या है मामला?
यह पूरा विवाद 7 अक्टूबर 2019 का है। अंबाह के रुअरिया गांव के रहने वाले रामशंकर जाटव (जो पीएससी की तैयारी कर रहे हैं) के साथ गांव के कुछ दबंगों ने मारपीट की थी।
पीड़ित रामशंकर जाटव ने जो बताया..
"मैं शिकायत लेकर सिंहौनिया थाने गया था। तत्कालीन थाना प्रभारी एसआई पुष्पक शर्मा ने मेरी रिपोर्ट लिखने के बजाय उल्टा मुझ पर ही केस दर्ज कर दिया। जब मैंने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) में की, तो मुझे घर से उठवाकर थाने लाया गया, बेरहमी से पीटा गया और जबरन शिकायत बंद कराई गई।"
थाने में न्याय न मिलने पर पीड़ित ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए 25 जून 2022 को पुष्पक शर्मा सहित चार लोगों पर एससी-एसटी एक्ट और मारपीट की धाराओं में केस दर्ज करने का आदेश दिया। बाकी आरोपी कोर्ट में पेश हो गए, लेकिन रसूखदार पुलिस अफसर गायब रहा।
सफेद झूठ: 'मुझे वारंट की जानकारी नहीं, लेकिन हाईकोर्ट में लगाई जमानत'
जब इस मामले में आरोपी टीआई पुष्पक शर्मा से बात की गई तो उनका जवाब हैरान करने वाला था। उन्होंने दावा किया कि, "मुरैना कोर्ट में उनके खिलाफ कोई मामला पेंडिंग नहीं है और न ही उन्हें किसी वारंट की जानकारी है।"
झूठ की खुली पोल:
शर्मा का यह दावा पूरी तरह झूठा साबित होता है, क्योंकि विशेष न्यायालय से वारंट जारी होने के बाद खुद पुष्पक शर्मा ने 4 सितंबर 2025 को अपने वकील के जरिए ग्वालियर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका दायर की थी। सवाल यह है कि अगर उन्हें वारंट की जानकारी ही नहीं थी, तो वे हाईकोर्ट क्यों भागे थे?

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