मुरैना।
सांदीपनी शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, पहाड़गढ़ में एक विवादित मामला सामने आया है. छात्र-छात्राओं का आरोप है कि प्रिंसिपल ने स्कूल में प्रतिदिन होने वाली सरस्वती वंदना पर रोक लगा दी है. साथ ही बच्चों को तिलक लगाकर स्कूल आने से मना किया है. इसी संबंध में स्कूल के स्टाफ और प्रिंसिपल के बीच तीखी बहस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया जा रहा है. मुरैना अपर कलेक्टर ने वीडियो को संज्ञान में लेकर मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
प्रिंसिपल पर सरस्वती वंदना पर रोक का आरोप
स्कूल को शिक्षा का मंदिर कहा जाता है और मां सरस्वती को शिक्षा की देवी का दर्जा दिया गया है. स्कूलों में कक्षाएं शुरू होने से पहले सरस्वती वंदना करने की परंपरा है. मुरैना के सांदीपनी विद्यालय में इसी को लेकर विवाद सामने आया है. आरोप है कि प्रिंसिपल मुरारी लाल पवैया ने स्कूल स्टाफ को सख्त हिदायत दी है कि स्कूल में अब से सरस्वती वंदना नहीं होगी. साथ ही उन्होंने कहा है कि कोई भी विद्यार्थी स्कूल में तिलक लगाकर नहीं आएगा. शुक्रवार को इसको लेकर स्कूल स्टाफ और प्रिंसिपल में जमकर बहस हो गई.
प्रिंसिपल और स्कूल स्टाफ में हो गई तीखी बहस
प्रिंसिपल और स्कूल स्टाफ की तीखी बहस का वीडियो सामने आया है. जिसमें एक स्टाफ प्रिंसिपल पर बुरी तरह नाराज होता दिख रहा है. स्टाफ कह रहा है "आप विद्यार्थियों और स्टाफ के साथ बुरा सलूक करते हैं. छात्रों को तिलक लगाने से रोकते हैं. सरस्वती वंदना से भी आपको तकलीफ है. यह शिक्षा का मंदिर है, यहां देवी की पूजा क्यों न हो? आप खुद स्कूल में रहते हैं. यहां कपड़े सुखाते हैं, तौलिये लपेटे घूमते हैं. ऐसा कोई नियम नहीं, फिर भी हम चुप रहते हैं."
'प्रिंसिपल ने रोक दी सरस्वती वंदना'
छात्रों में भी इस मामले को लेकर नाराजगी है. एक छात्र ने कहा, "हम रोजाना सरस्वती वंदना करते थे और तिलक लगाकर आते थे. अब हमें यह करने की अनुमति नहीं है. यह हमारे लिए दुख की बात है. हमने सरस्वती वंदना करने का प्रयास किया लेकिन प्रिंसिपल ने आकर रोक दिया." प्रिंसिपल मुरारी लाल पवैया का कहना है "यह आदेश स्कूल के अनुशासन और नियमों के पालन के लिए दिया गया है." स्थानीय लोगों और बच्चों के अभिभावकों में भी इस आदेश को लेकर नाराजगी है.
सांस्कृतिक विकास और परंपराओं का सम्मान जरूरी'
एक शिक्षक का कहना है कि स्कूल में परंपरा और अनुशासन का संतुलन होना चाहिए, लेकिन यहां बच्चों की भावनाओं की अनदेखी की जा रही है. उनके मानसिक और सांस्कृतिक विकास के लिए परंपराओं का सम्मान जरूरी है. एक अभिवाक का कहना है कि स्कूल में शिक्षा के साथ-साथ हमारी परंपराओं को भी सुरक्षित रखना चाहिए.
मुरैना अपर कलेक्टर अश्वनी कुमार रावत के संज्ञान में भी ये मामला आया है. उनका कहना है "इस पूरे मामले की जांच कराई जाएगी. यह देखा जाएगा का आखिर स्कूल में सरस्वती वंदना पर रोक क्यों लगाई गई है."