डीजे-बैंड बाजे के साथ निकाली प्याज की अर्थी, श्मशान घाट में बिलख-बिलखकर रोये किसान
मंदसौर।
सोयाबीन की फसल से बर्बाद हुए किसानों को अब प्याज ने कर्ज के दलदल में धकेल दिया है. कृषि उपज मंडियों में प्याज महज 02 से लेकर 07 रुपये किलो के दाम पर बिक रही है. किसानों को फसल का लागत मूल्य मिलने की बात तो दूर है, मंडियों में ले जाने का भाड़ा भी नहीं निकल रहा. इससे किसानों में भारी आक्रोश है. मंदसौर जिले के ग्राम धमनार के किसानों ने प्याज की फसल को मरा हुआ मानकर इसका विधिवत तरीके से अंतिम संस्कार किया. इस दौरान किसान रो-रोकर प्याज को अंतिम विदाई दी.
प्याज की अर्थी सजाई, गांव में निकाली अंतिम यात्रा
किसानों ने प्याज की फसल को खेत-खलिहान से लाकर अर्थी पर सजाया और उसके बाद उसे कफन ओढ़ाकर हार फूल चढ़ाए. इसके बाद बैंड बाजे के साथ गांव में प्याज की अंतिम यात्रा निकाली. श्मशान घाट में प्याज का अंतिम संस्कार किया गया. आक्रोशित किसानों ने सरकार से प्याज के दाम बढ़ाने और इसका भरपूर निर्यात करने की मांग की है. किसानों का कहना है "महंगाई के इस दौर में प्याज की फसल के उत्पादन में भारी लागत लगाना पड़ रही है. बदले में उन्हें इतने कम दाम मिलते हैं कि मंडियों तक ले जाना मुश्किल हो रहा है."
खेत में ही नष्ट कर रहे प्याज की फसल
मालवा इलाके में किसानों में प्याज के गिरते दामों को लेकर के भारी नाराजगी है. खर्चे के चक्कर में मंदसौर जिले के कई किसान प्याज की फसल को अब अपने खेतों से उखाड़ रहे हैं. कई किसानों ने प्याज की फसल में मवेशियों को चरने के लिए खुला छोड़ दिया है. कई किसान रोटावेटर से प्याज की फसल नष्ट कर रहे हैं. परेशान होकर किसानों ने सरकार तक अपनी बात पहुंचने के लिए अनूठा प्रदर्शन किया.

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