मैहर।
मध्यप्रदेश के मैहर जिला मुख्यालय में गुरुवार को विभिन्न शासकीय विभागों की प्रगति समीक्षा बैठक के दौरान एक बेहद अजीबोगरीब और अनोखा वाकया सामने आया। बैठक ले रहे रीवा संभाग के कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने जब देखा कि समीक्षा के दौरान कई अधिकारी और कर्मचारी बार-बार उठकर वॉशरूम (शौचालय) जा रहे हैं, तो वे अपनी नाराजगी रोक नहीं पाए।
बार-बार क्यों जा रहे हैं बाहर?
रीवा कमिश्नर ने तल्ख लहजे में टोकते हुए पूछा आप लोग बार-बार बाहर क्यों भाग रहे हैं, शुगर पेशेंट हैं क्या? बात सिर्फ टोकने तक ही सीमित नहीं रही। कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह ने इसे गंभीरता से लेते हुए बैठक में ही मौजूद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला को तत्काल कड़े निर्देश दिए कि मीटिंग में मौजूद हर एक अधिकारी और कर्मचारी का ऑन-स्पॉट ब्लड शुगर टेस्ट कराया जाए।
बैठक कक्ष के बाहर बना ग्लूकोमीटर सेंटर
कमिश्नर का फरमान मिलते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सिविल अस्पताल मैहर के पैरामेडिकल स्टाफ को मेडिकल किट के साथ कलेक्ट्रेट सभाकक्ष बुलाया गया। बैठक कक्ष के ठीक बाहर ही ग्लूकोमीटर के साथ एक विशेष जांच शिविर स्थापित कर दिया गया। एक-एक करके बैठक में मौजूद सभी 49 अधिकारियों और कर्मचारियों की उंगलियां पंच कर ब्लड शुगर की रैंडम जांच की गई।
16 अधिकारियों का शुगर लेवल निकला 200 पार
जब जांच की रिपोर्ट कमिश्नर के सामने टेबल पर आई तो नतीजे बेहद चौंकाने वाले थे। कुल 49 लोगों की जांच में से 16 अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्लड शुगर लेवल 200 से कहीं अधिक पाया गया। इस जांच का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि इनमें से 3 आला अधिकारी ऐसे निकले, जिन्हें जीवन में पहली बार पता चला कि वे साइलेंट किलर कहे जाने वाले डायबिटीज की चपेट में आ चुके हैं। वहीं, शेष 13 अधिकारी-कर्मचारी पहले से ही शुगर के मरीज थे और उनकी रिपोर्ट अनियंत्रित आई। बाकी बचे 33 अधिकारियों का शुगर लेवल पूरी तरह सामान्य या नियंत्रित पाया गया।
फटकार के बाद मिली सीख
जांच रिपोर्ट देखने के बाद कमिश्नर शीलेन्द्र सिंह का गुस्सा शांत हुआ और उन्होंने अधिकारियों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की नसीहत दी। कमिश्नर ने कहा कि लगातार वॉशरूम जाना मधुमेह का एक प्राथमिक लक्षण है, जिसे अक्सर लोग काम के तनाव में नजरअंदाज कर देते हैं। शासकीय सेवा में रहकर अधिकारी अपने स्वास्थ्य की अनदेखी न करें, क्योंकि स्वस्थ शरीर से ही बेहतर कार्यप्रणाली संभव है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया कि जिन अधिकारियों की रिपोर्ट अनियंत्रित आई है, उन्हें तुरंत चिकित्सीय परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराई जाएं।