भोपाल / कटनी, सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश की राजनीति में उस वक्त नया भूचाल आ गया, जब भाजपा के सबसे अमीर विधायकों में शुमार और पूर्व मंत्री संजय पाठक ने भरे मंच से कटनी के विकास को लेकर अपनी ही सरकारों और नेतृत्व को कटघरे में खड़ा कर दिया। एक कार्यक्रम में बोलते हुए संजय पाठक का दर्द इस कदर छलका कि उन्होंने कटनी की तुलना 'कस्बे' से कर दी। हालांकि,'सबकी खबर' ने इस बयान का तीखा विश्लेषण करते हुए खुद संजय पाठक और उनके परिवार को ही इस दुर्दशा का असली जिम्मेदार ठहराया है।
संजय पाठक का वह बयान, जिसने मचाई खलबली
संजय पाठक ने भरे मंच से अपनी भाषा का अतरंगी प्रदर्शन करते हुए कहा: "कटनी का ढंग से डेवलपमेंट नहीं हो पाया। कटनी के नीचे रहने वाले शहर रीवा के लोग 'रेवाड़ी' और देहाती कहलाते थे, आज रीवा महानगर बन गया। शहडोल, दमोह, सतना बढ़ गए। छोटे-छोटे अंडला-मंडला और डिंडोरी जैसे शहर डेवलप हो गए, लेकिन कटनी आज भी एक बड़ा कस्बा ही बनकर रह गया है।" संजय पाठक ने भले ही यह कहकर अपनी पीठ थपथपाई कि जो भी काम हुए वो भाजपा सरकार में हुए, लेकिन उन्होंने साफ माना कि जिस गति से कटनी को आगे बढ़ना था, वह गति आज तक नहीं मिली।
"चाइना या पाकिस्तान नहीं... पाठक जी, कटनी के पिछड़ेपन के जिम्मेदार आप खुद हैं"
सबकी खबर ने विधायक के इस बयान पर ऑन-रिकॉर्ड तथ्यों के साथ पाठक परिवार की पोल खोल कर रख दी। कटनी का विकास न होने के लिए क्या कोई विदेशी ताकतें जिम्मेदार हैं? इसके असली जिम्मेदार तो खुद संजय पाठक और उनका परिवार है:
जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार थी, तब पूरा पाठक परिवार कांग्रेस में था। संजय पाठक के पूज्य पिता सत्येंद्र पाठक खुद विधायक और मंत्री रहे, साथ ही वे 'सुधा सुधार न्यास' के अध्यक्ष भी थे। अगर तब विकास नहीं हुआ, तो क्या संजय पाठक अपने स्वर्गीय पिता के नेतृत्व को कोस रहे हैं? आरोप है कि जिन कॉलोनियों के लिए जमीनें ली गई थीं, उन्हें लेकर आज भी कोर्ट में केस चल रहे हैं। कटनी के विकास का दावा करके संजय पाठक ने अपनी मां निर्मला पाठक को 5 साल तक कटनी का महापौर (मेयर) बनवाया था। फिर भी कटनी कस्बा ही क्यों रहा? संजय पाठक खुद नगर पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत अध्यक्ष, तीन बार के विधायक और सूबे के कद्दावर मंत्री रह चुके हैं। कांग्रेस में रहकर भी इस परिवार ने मलाई खाई और भाजपा में आकर भी मलाई खा रहे हैं। खुद का तो भरपूर विकास हुआ, लेकिन शहर जस का तस रहा। ऐसे में कटनी की दुर्दशा का हिसाब जनता किससे मांगे?
सांसद बी.डी. शर्मा और शिवराज सरकार को भी लपेटा
संजय पाठक ने जाने-अनजाने में पूर्व प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और खजुराहो-कटनी के सांसद वी.डी. शर्मा को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। वी.डी. शर्मा पिछले 7 साल से वहां के सांसद हैं और 5 साल तक प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं। ऐसे में कटनी को पिछड़ा बताना सीधे तौर पर सांसद के कार्यकाल पर भी सवालिया निशान है। यही नहीं, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ संजय पाठक की जुगलबंदी जगजाहिर थी। "पाठक जी, यदि आप सरकारें गिराने-बनाने और विधायक-सांसद खरीदने के जोड़-तोड़ में फोकस न करके कटनी और विजयराघवगढ़ के विकास में ध्यान लगाते, तो आज यह नौबत नहीं आती। विजयराघवगढ़ आज कहां खड़ा है, इसका तो अंदाज ही नहीं है।"
खुद ही खोल दी अपने परिवार की पोल!
निष्कर्ष यही है कि संजय पाठक ने जनता के सामने खुद ही अपने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। उनके इस बयान ने यह संदेश साफ कर दिया है कि सत्ता में रहने के बावजूद न उनके पिता, न मां, न वे खुद, न उनकी सरकार और न ही उनके क्षेत्र के बड़े नेता कटनी का कायाकल्प कर पाए। अब देखना यह है कि इस 'सेल्फ-गोल' के बाद भाजपा संगठन और खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पर क्या रुख अपनाते हैं।