बरगी क्रूज हादसा: मौत के टापू पर पहुंचे उमंग सिंघार, बोले— ‘यह हादसा नहीं, सरकारी हत्या है; भ्रष्ट अफसरों को कब तक बचाएगी सरकार?’
जबलपुर।
संस्कारधानी जबलपुर के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे ने अब एक बड़ा सियासी मोड़ ले लिया है। हादसे के बाद पीड़ितों का दर्द बांटने और जमीनी हकीकत जानने पहुंचे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखे हमले किए। सिंघार ने इस घटना को मात्र एक इत्तेफाक मानने से साफ इनकार करते हुए इसे 'शुद्ध सरकारी लापरवाही' करार दिया।
"अफसरों को बचाने की साजिश बंद हो"
घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद उमंग सिंघार ने मीडिया से चर्चा करते हुए सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, "क्या सरकार का काम सिर्फ जांच कमेटियां बनाना है? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पष्ट करें कि वे अपने भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देना चाहते हैं या देश-दुनिया (केरल और दिल्ली) से आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं?" सिंघार ने मांग की कि इस मामले में केवल सस्पेंशन काफी नहीं है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों पर धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज होना चाहिए।
24 घंटे का अल्टीमेटम और न्याय की गुहार
विपक्ष ने सरकार की कार्यप्रणाली को 'पोस्टमार्टम पॉलिटिक्स' बताते हुए कहा कि सरकार हमेशा चिड़िया चुग गई खेत के बाद ही जागती है। सिंघार ने सीधे मुख्यमंत्री से सवाल किया— "क्या आपकी सरकार में इतनी संवेदनशीलता बची है कि 24 घंटे के भीतर पीड़ित परिवारों को न्याय और दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेज सके?"
हादसे के पीछे के अनसुलझे सवाल
विपक्ष ने बरगी में चल रहे क्रूज और नावों के संचालन पर कई तकनीकी सवाल भी खड़े किए हैं: क्या क्रूज पर क्षमता से अधिक लोग सवार थे? लाइफ जैकेट और आपातकालीन बचाव दल मौके पर मौजूद क्यों नहीं था? पर्यटन विभाग के अधीन चलने वाले इन क्रूज का आखिरी फिटनेस टेस्ट कब हुआ था?
पर्यटन पर पड़ेगा बुरा असर
सिंघार ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसे ही हादसे होते रहे और अधिकारियों को बचाया जाता रहा, तो मध्य प्रदेश का पर्यटन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा। केरल और दिल्ली जैसे दूरदराज के इलाकों से आने वाले लोग यहाँ 'एडवेंचर' के लिए आते हैं, अपनी 'जान' देने नहीं। बरगी का यह शांत जल अब सियासत के भंवर में है। उमंग सिंघार के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक छोड़ने वाली नहीं है। अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह 'एक्शन' लेती है या सिर्फ 'आश्वासन' से काम चलाती है।

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