"IAS भरत यादव तलब: हाईकोर्ट ने कहा- रिपोर्ट असंतोषजनक, अब व्यक्तिगत रूप से दें जवाब"
जबलपुर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सीधी जिले के एक रेवेन्यू इंस्पेक्टर (RI) के पदोन्नति मामले में पेश की गई रिपोर्ट को असंतोषजनक बताते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। जस्टिस विशाल मिश्रा की सिंगल बेंच ने अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए तत्कालीन आयुक्त और IAS अधिकारी भरत यादव को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 15 अप्रैल को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
सीधी जिले के रामपुर नैकिन नगर पालिका में पदस्थ याचिकाकर्ता आलोक कुमार सिंह की ओर से यह मामला हाईकोर्ट में दाखिल किया गया है। आवेदक का कहना है कि 14 अक्टूबर 2021: जिला पदोन्नति समिति ने 5 उम्मीदवारों में से आवेदक के नाम की सिफारिश की। 20 जून 2022: तत्कालीन आयुक्त ने सिफारिश खारिज कर दी। 14 दिसंबर 2023 को हाईकोर्ट ने आयुक्त का आदेश रद्द कर 90 दिन में प्रमोशन देने के निर्देश दिए। बावजूद इसके आदेश का पालन नहीं हुआ, जिसके बाद अवमानना याचिका दायर की गई।
कोर्ट ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास मिश्रा ने दलीलें रखीं। अदालत ने पाया कि पहले भी दो रिपोर्ट पेश की जा चुकी हैं, लेकिन दोनों ही अधूरी और असंतोषजनक थीं। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने कहा कि अब जिम्मेदार अधिकारी खुद उपस्थित होकर जवाब दें।
क्या संकेत देता है फैसला?
-यह मामला सिर्फ एक प्रमोशन विवाद नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र द्वारा कोर्ट के आदेशों के पालन की गंभीरता को दर्शाता है। हाईकोर्ट का यह रुख साफ संकेत है कि “आदेश के पालन करो, वरना अदालत खुद जवाब तलब करेगी।”

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