जबलपुर। 
मध्य प्रदेश के अरबपति भाजपा विधायक संजय पाठक की मुश्किलें अब बेहद गंभीर मोड़ पर आ गई हैं। जबलपुर हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाते हुए विधायक के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर 'आपराधिक अवमानना' (का मामला दर्ज कर लिया है। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब जस्टिस विशाल मिश्रा की कोर्ट में पाठक के परिवार की कंपनियों द्वारा की गई ₹443 करोड़ की अवैध माइनिंग के मामले की सुनवाई होनी थी। जस्टिस मिश्रा ने बाकायदा अपनी ऑर्डर शीट में यह लिखकर खुद को केस से अलग कर लिया कि संजय पाठक ने उन्हें फोन पर संपर्क कर प्रभावित करने की कोशिश की थी।
अब चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विवेक सराफ की डबल बेंच ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक के खिलाफ सीधा मुकदमा कायम किया है और अगली सुनवाई के लिए 26 अप्रैल की तारीख मुकर्रर कर दी है, जिसमें संजय पाठक को खुद कोर्ट में पेश होना होगा। केवल अदालती कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रशासन का शिकंजा भी कसता जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के क्षेत्र दौरे के तुरंत बाद जबलपुर कलेक्टर ने भी विधायक की कंपनियों को अवैध माइनिंग की वसूली का अंतिम नोटिस थमा दिया है। सूत्रों की मानें तो पेनल्टी, ब्याज और जीएसटी मिलाकर यह वसूली राशि ₹2000 करोड़ तक पहुंच सकती है। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब विधायक पर जेल जाने की तलवार लटक गई है, क्योंकि कोर्ट ने साफ कर दिया है कि रसूख चाहे कितना भी बड़ा हो, न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आशुतोष मनु दीक्षित की याचिका के मुताबिक 1 सितंबर 2025 को न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने इस मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया था। उन्होंने अपने आदेश में इसका उल्लेख किया था कि विधायक संजय पाठक की ओर से उनसे फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, जिससे न्यायिक निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी। इस कारण उन्होंने उक्त प्रकरण की सुनवाई से स्वयं को अलग करते हुए पूरे मामले को प्रशासनिक स्तर पर मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दे दिए थे।