750 करोड़ के सीवेज टेंडर से पहले बड़ा खेल? एक ही प्रोजेक्ट के कई-कई कंप्लीशन सर्टिफिकेट पर उठे सवाल
जबलपुर।
मध्य प्रदेश में नगरीय निकायों के बड़े सीवेज टेंडरों में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। जबलपुर नगर निगम द्वारा निकाले गए करीब 750 करोड़ रुपए के सीवेज प्रोजेक्ट से पहले कुछ कंपनियों के अनुभव प्रमाण पत्रों में गंभीर विसंगतियां होने के आरोप लगे हैं। जानकारी के मुताबिक, मुरैना में सीवेज प्रोजेक्ट पूरा करने वाली एक कंपनी को एक ही काम के लिए अलग-अलग तारीखों में दो कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी हुए, जिनमें काम की राशि अलग-अलग दर्शाई गई है। जबकि मूल ठेका करीब 128 करोड़ रुपए का था, प्रमाण पत्रों में राशि 146 करोड़ और 162 करोड़ रुपए बताई गई।
इसी तरह उल्लासनगर में सीवेज कार्य करने वाली दूसरी कंपनी के पास भी एक ही प्रोजेक्ट के तीन अलग-अलग कंप्लीशन सर्टिफिकेट बताए जा रहे हैं। मूल ठेका करीब 403 करोड़ रुपए का था, लेकिन प्रमाण पत्रों में 390 करोड़, 401 करोड़ और 440 करोड़ रुपए तक की राशि दर्ज होने का दावा है। आरोप है कि कंपनियां बड़े टेंडर हासिल करने के लिए बढ़ी हुई लागत वाले प्रमाण पत्रों का उपयोग कर रही हैं। अब सवाल यह है कि टेंडर प्रक्रिया में इन दस्तावेजों का सत्यापन कैसे और किस स्तर पर होगा।
मामला सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों से पारदर्शी जांच और प्रमाण पत्रों के सत्यापन की मांग उठ रही है। यदि आरोप सही पाए गए, तो यह नगरीय निकायों की निविदा प्रक्रिया पर बड़ा सवाल खड़ा कर सकता है।

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