जबलपुर। 
हाईकोर्ट ने जबलपुर में पुलिसकर्मी से अभद्रता और वर्दी फाड़ने के मामले में निष्पक्ष जांच न होने पर नाराजगी जताई है। राजनीतिक दबाव के चलते पूर्व महापौर और समर्थकों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज न होने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने जांच एसटीएफ जबलपुर को सौंपने का आदेश दिया है। एसटीएफ को अगली सुनवाई पर सील बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करनी होगी। यह मामला 17 फरवरी को फिर सुना जाएगा।
पुलिसकर्मी की फाड़ी थी वर्दी
यह मामला तब सामने आया जब जबलपुर निवासी अधिवक्ता मोहित वर्मा ने एक जनहित याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि लार्डगंज थाना क्षेत्र में वाहन चेकिंग के दौरान पूर्व महापौर प्रभात साहू को एक पुलिसकर्मी ने हेलमेट न पहनने पर रोका था। आरोप है कि पूर्व महापौर ने पुलिसकर्मी से अभद्रता की और उनके समर्थकों ने मिलकर पुलिसकर्मी की वर्दी फाड़ दी। इसके बावजूद, राजनीतिक दबाव के कारण पुलिसकर्मी के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर उसे निलंबित कर दिया गया। घटना का वीडियो वायरल होने के बावजूद, पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया, जबकि वीडियो में आरोपी स्पष्ट दिख रहे थे।
थाना प्रभारी को पेश होने के निर्देश
शुरुआती सुनवाई में, युगलपीठ ने लार्डगंज थाना प्रभारी को दोनों एफआईआर और केस डायरी के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा था कि 'जब पुलिसकर्मी सुरक्षित नहीं तो वह आम जनता को कैसे सुरक्षा प्रदान करेंगे।' कोर्ट ने पूर्व महापौर और जबलपुर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था।
इसलिए सौंपी गई STF को जांच
मंगलवार को हुई सुनवाई में, लार्डगंज थाना प्रभारी नवल आर्य दोनों एफआईआर और केस डायरी के साथ उपस्थित हुए। युगलपीठ ने मेडिकल रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद पाया कि दोनों मामलों में सही और निष्पक्ष जांच नहीं हुई है। इसी के चलते कोर्ट ने जांच एसटीएफ जबलपुर को सौंपने का आदेश दिया है।