जबलपुर।
जिस दिन से नगर निगम में ई-अटेंडेंस में फेस रिकॉग्निशन का नियम शुरू हुआ है, उस दिन से जबलपुर नगर निगम के लगभग एक करोड़ रुपये प्रतिमाह की चोरी बंद हो गई. नगर निगम में अक्टूबर के बाद से ही 600 से ज्यादा आउटसोर्स कर्मचारी अटेंडेंस लगाने नहीं पहुंचे. अब सामाजिक संगठन यह मांग कर रहे हैं कि अक्टूबर के पहले तक 600 कर्मचारियों का पैसा किन लोगों की जेब में जा रहा था, इस मामले की जांच की जाए.
जबलपुर नगर निगम में अटेंडेंस पर सख्ती
जबलपुर नगर निगम मध्य प्रदेश के बड़े स्थानीय निकायों में से एक है. जबलपुर नगर निगम में कुल मिलाकर 8400 कर्मचारी काम करते हैं. इनमें नियमित, दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं. जबलपुर नगर निगम कमिश्नर रामप्रकाश अहिरवार ने अक्टूबर से नया नियम बनाया, जिसके तहत हर कर्मचारी को फेस रिकॉग्निशन के साथ अटेंडेंस दर्ज करवानी होगी. इस तकनीक में कर्मचारियों को नगर निगम के ऐप पर जाकर अपनी एक फोटो सुबह और शाम अपलोड करनी पड़ती है, ताकि आपकी फोटो के आधार पर आपके काम की जगह और आपकी उपस्थिति दर्ज हो सके.
ई-अटेंडेंस में 32 कर्मचारी लापता मिले
जबलपुर नगर निगम में यह नियम लागू किया गया तो सबसे पहले 32 नियमित कर्मचारी लापता पाए गए. इन लोगों ने बीते 2 माह से ई-अटेंडेंस ही नहीं लगाई. नगर निगम कमिश्नर राम प्रकाश अहिरवार का कहना है "जो भी सरकारी कर्मचारी नियमित हैं और अटेंडेंस नहीं लग रहा है, मतलब वह काम नहीं कर रहा है. ऐसी स्थिति में इन लोगों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं और यदि संतोषजनक जवाब नहीं आता तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी.
कर्मचारी नेताओं को नई व्यवस्था से दिक्कत
नियमित कर्मचारियों में कुछ ऐसे कर्मचारी हैं जो कर्मचारी नेता हैं और विभागीय काम करने की जगह नेतागिरी में लगे रहते हैं. इसलिए वह ई-अटेंडेंस का विरोध कर रहे हैं. नगर निगम कमिश्नर राम प्रकाश अहिरवार ने बताया "ज्यादा बड़ी संख्या आउटसोर्स कर्मचारी हैं. लगभग 600 आउटसोर्स कर्मचारी ऑनलाइन अटेंडेंस नहीं लगा रहे. अक्टूबर के बाद से उनकी तनख्वाह नहीं बनी है."
सफाई ठेकेदार व अफसरों की मिलीभगत
आरटीआई एक्टिविस्ट अखिलेश त्रिपाठी का कहना है "नगर निगम में घोटाला चल रहा है, जिसमें स्वास्थ्य विभाग में सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति की जाती है. जबलपुर नगर निगम में लगभग 3000 सफाई कर्मचारी आउटसोर्स के जरिए लिए जाते हैं. ठेकेदार तनख्वाह तो पूरे कर्मचारी की लेता है लेकिन मौके पर पूरे कर्मचारी नहीं होते. जब फेस रिकॉग्निशन आधारित अटेंडेंस शुरू की गई तो यह घोटाला सामने आया." आउटसोर्स के हर कर्मचारी को लगभग ₹15000 प्रति माह के हिसाब से तनख्वाह दी जाती है. मतलब 600 कर्मचारियों को हर माह 90 लाख रुपए की तनख्वाह दी जा रही थी, जो ठेकेदार के माध्यम से नेताओं और अधिकारियों की जेब में पहुंचती थी.