विधि विभाग राष्ट्रपति या गवर्नर नहीं जो हाईकोर्ट को निर्देश दे... अधिकारी और अधिवक्ता को लिखित में मांगनी पड़ी माफी
जबलपुर ।
एमपी हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक अग्रवाल और राम कुमार चौबे की युगलपीठ ने विधि एवं विधाग विभाग पर टिप्पणी की है। सुनवाई के दौरान विधि एवं विधायिक विभाग के अंडर सेक्रेटरी आरके सिंह और सरकारी अधिवक्ता ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अंडरटेकिंग दी है। लिखित अंडरटेकिंग में दी गई कि विधि एवं विधायिक विभाग को हाईकोर्ट से एक्शन के संबंध में कंस्ट्रक्शन प्राप्त करने का अधिकार नहीं है।
हाईकोर्ट से बिना शर्त मांगी माफी
साथ ही लिखा कि विधि विभाग राष्ट्रपति और गवर्नर नहीं है जो हाईकोर्ट के निर्देश देने का अधिकार रखता है। इसके साथ ही दोनों ने हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी। युगलपीठ ने दोनों को शाम तक लिखित माफीनामा प्रस्तुत करने के आदेश जारी किए हैं।
निर्मल कुमार झा ने दायर की थी अपील
गौरतलब है कि हत्या के अपराध में अनूपपुर जिला न्यायालय के द्वारा आजीवन कारावास सजा से दंडित किए जाने के खिलाफ निर्मल कुमार झा ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान उसकी तरफ से तर्क किया गया था कि प्रकरण में दो अभियोजन साक्षी के धारा 161 के तहत दिए गए बयान रिकॉर्ड में मौजूद हैं। अतिरिक्त लोक अभियोजन ने प्रकरण की सुनवाई के दौरान दोनों अभियोजन साक्षी से एग्ज़ामिनेशन इन चीफ किया था और उनसे धारा 161 के तहत दर्ज बयानों के संबंध में कुछ नहीं पूछा था। जिससे पहली नजर यह पता चलता है कि अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अपनी ईमानदारी से समझौता किया है। हाईाकोर्ट ने अतिरिक्त लोक अभियोजन के खिलाफ जांच कर तीन सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के आदेश जारी किए थे।

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