नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित तीन नेताओं को MP MLA कोर्ट का नोटिस
जबलपुर।
एमपी एमएलए कोर्ट जबलपुर ने आपराधिक मानहानि के मामले में मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राहुल सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री लखन घनघोरिया के खिलाफ नोटिस जारी किया है. अदालत ने 16 जनवरी तक उन्हें अपने जवाब के साथ कोर्ट में पेश होने के आदेश भी दिए हैं. जानकारी के मुताबिक विजय पांडे जबलपुर स्वास्थ्य विभाग में जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीएम) के पद पर पदस्थ थे. जबलपुर पूर्व विधानसभा से कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने आरोप लगाया था कि विजय पांडे ने फर्जी मार्कशीट्स के आधार पर रिश्वत देकर नौकरी पाई है. दरअसल विजय पांडे की नियुक्ति 2008 में डाटा एंट्री ऑपरेटर के रूप में हुई थी और उन्होंने कुछ परीक्षाएं ओपन परीक्षा के माध्यम से दी थीं. उनकी डिग्री पर विधायकों ने सवाल खड़े किए थे.
तीनों नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर डीपीएम विजय पांडे की नियुक्ति पर उठाए थे सवाल
कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने इस मुद्दे को मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठाया. मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और अजय सिंह राहुल ने भी इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा. इस मुद्दे पर विधानसभा में हंगामे के बाद नेताओं ने विधानसभा से वॉकआउट कर दिया था. इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विजय पांडे की नियुक्ति पर सवाल उठाए गए थे. यह घटना 5 अगस्त 2025 की है.
विधानसभा में हंगामे के बाद सरकार हरकत में आई और मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन सलोनी सिडाना ने विजय पांडे को पद से हटा दिया. विजय पांडे के एडवोकेट परितोष गुप्ता ने बताया कि नौकरी जाने के बाद विजय पांडे ने मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस नेता राहुल सिंह और लखन घनघोरिया के खिलाफ जबलपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में आपराधिक मानहानि की शिकायत की.
कोर्ट ने पूछा, आखिर किस आधार पर अपने विजय पांडे के खिलाफ लगाए थे आरोप
विजय पांडे ने बताया कि उनके ऊपर लगाए गए सारे आरोप गलत हैं. जांच में विजय पांडे के खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप को सही नहीं पाया गया. जिन डिग्रियों पर सवाल खड़े किए जा रहे थे वे सही पाई गईं. एमपी एमएलए कोर्ट ने इस मामले में विजय पांडे का पक्ष सुनकर कांग्रेस के तीनों नेताओं के खिलाफ नोटिस जारी किया गया है. कोर्ट ने पूछा है कि आखिर किस आधार पर अपने विजय पांडे के खिलाफ आरोप लगाए थे? एमपी एमएलए कोर्ट के जज डीके सूत्रकार ने अपने आदेश में लिखा है कि भी एनएसएस की धारा 223 के तहत इस मामले में इन तीन विधायकों को जवाब देना होगा. कोर्ट ने 16 जनवरी तक उन्हें अपने जवाब के साथ कोर्ट में पेश होने के आदेश भी दिए हैं. एडवोकेट परितोष गुप्ता का कहना है कि इस मामले में विधायकों को 2 साल तक की सजा भी हो सकती है.

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