सायरन और हुटर वाली 'साहबी' को ठेंगा: लग्जरी कार छोड़ साइकिल से हाईकोर्ट पहुंचे जस्टिस बंसल, दिया देशभक्ति का बड़ा संदेश
जबलपुर।
अक्सर जब सड़कों पर सायरन बजती गाड़ियाँ और हुटर सुनाई देते हैं, तो आम आदमी खुद को ठगा सा महसूस करता है। उसे लगता है कि 'साहब' और 'आम नागरिक' के बीच की खाई कभी नहीं भर सकती। लेकिन मंगलवार सुबह जबलपुर की सड़कों ने एक ऐसा मंजर देखा, जिसने सत्ता, पद और प्रतिष्ठा की पुरानी परिभाषाओं को बदल कर रख दिया।
दिखावे का मोह छोड़ा, जिम्मेदारी को ओढ़ा
हाईकोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल जब अपनी आलीशान लग्जरी कार को गैरेज में खड़ा कर, साधारण सी साइकिल पर सवार होकर निकले, तो यह महज एक 'सफर' नहीं था। यह एक संदेश था—कि पद इंसान को बड़ा बनाता है, लेकिन सादगी उसे महान बनाती है। 3 किलोमीटर के उस सफर में जस्टिस बंसल ने न केवल पेट्रोल बचाया, बल्कि उन हजारों युवाओं को एक नई राह दिखाई जो स्टेटस सिंबल के लिए कर्ज लेकर गाड़ियाँ खरीदते हैं।
साइकिल की घंटी में छिपी राष्ट्रभक्ति
जस्टिस बंसल ने मीडिया से बात करते हुए एक बहुत ही भावुक बात कही। उन्होंने कहा, "यह सोचना गलत है कि जज साइकिल से नहीं जा सकते।" उनकी इस बात में एक गहरा दर्द भी था और देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा भी। उन्होंने पीएम मोदी की अपील को केवल एक सरकारी आदेश नहीं, बल्कि 'मिट्टी का कर्ज' समझा। जब एक उच्च पद पर बैठा व्यक्ति पसीने से तर-बतर होकर दफ्तर पहुंचता है, तो वह पसीना देश की आर्थिक स्थिति और पर्यावरण को सींचने का काम करता है।
सहकर्मियों के लिए बने 'साइलेंट हीरो'
हाईकोर्ट पहुंचने पर जब कर्मचारियों ने अपने साहब को साइकिल स्टैंड पर देखा, तो पहले तो सन्नाटा पसर गया, फिर धीरे-धीरे चेहरे पर मुस्कान तैर गई। जस्टिस बंसल की इस सादगी ने दफ्तर के बाबू से लेकर चपरासी तक को प्रेरित कर दिया। कई कर्मचारियों ने उसी पल तय किया कि वे भी अब बैग और टिफिन लेकर साइकिल से आएंगे।
बदलाव का चेहरा: जस्टिस बंसल
आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन और महंगे ईंधन की मार झेल रही है, तब जस्टिस बंसल जैसे लोग उम्मीद की किरण बनकर उभरते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि देशहित के लिए सीमा पर गोली खाना ही एकमात्र रास्ता नहीं है; कभी-कभी अपनी सुविधा का त्याग कर साइकिल के पैडल मारना भी सबसे बड़ी देशभक्ति होती है। निश्चित ही, जस्टिस बंसल की इस 'साइकिल सवारी' ने न्याय के मंदिर तक जाने वाले रास्ते को और भी पावन और मानवीय बना दिया है।

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