भोपाल। 
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का 'नायक' वाला स्वरूप अब असर दिखाने लगा है। दो दिन पहले, यानी 22 तारीख को जब मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश से लौट रहे थे, तो उन्होंने अचानक अपना हेलीकॉप्टर सीधी में उतार दिया। वहां लोगों से सीधे संवाद के दौरान प्रशासन और कलेक्टर की कार्यप्रणाली को लेकर भारी शिकायतें मिलीं। मुख्यमंत्री ने इस पर कड़ा फैसला लेते हुए मौके पर ही कलेक्टर को हटाकर भोपाल अटैच कर दिया। इस कार्रवाई का असर अब पूरे मध्य प्रदेश में दिखने लगा है। ताजा मामला इंदौर की सांवेर तहसील के ग्राम टाकरोद का है। यहां किसान गोपाल तोशलीवाल ने अपनी जमीन के सीमांकन के लिए अक्टूबर 2025 में आवेदन दिया था। आरोप है कि पटवारी दीपशिखा कैथवास और आरआई धर्मेंद्र गुप्ता काम के बदले पैसों की मांग कर रहे थे और फाइल आगे नहीं बढ़ा रहे थे। जब किसान ने इसकी शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर की, तो पटवारी ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय यह कहकर मजाक उड़ाया कि "सीएम हेल्पलाइन से कुछ नहीं होता।" इस बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पत्रकार भुवन तोशनीवाल ने इस मामले को इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा के संज्ञान में लाया। सीधी की घटना के बाद शासन के सख्त रुख को देखते हुए इंदौर कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया और तत्काल जांच के बाद पटवारी दीपशिखा कैथवास और आरआई धर्मेंद्र गुप्ता को निलंबित कर दिया। मुख्यमंत्री की इस सक्रियता और जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से अब उन लापरवाह अधिकारियों में डर बैठ गया है जो किसानों और आम जनता के काम रोकने के आदी हो चुके थे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा का यह कदम निश्चित रूप से राजस्व विभाग की मनमानी पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा।