इंदौर में 'अपनों' की घेराबंदी का शिकार हुए भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष, रैली रद्द होने से सियासी पारा गर्म
इंदौर।
इंदौर में भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के प्रदेश अध्यक्ष श्याम टेलर के दौरे को लेकर उपजा विवाद अब भाजपा के भीतर गहरी होती गुटबाजी की कहानी बयां कर रहा है। असल में यह पूरा मामला महापौर पुष्यमित्र भार्गव की मशाल यात्रा में शामिल होने की योजना से शुरू हुआ था, जिसने देखते ही देखते एक बड़े सियासी टकराव का रूप ले लिया। एक तरफ युवा मोर्चा के कार्यकर्ता भव्य रैली और स्वागत की तैयारियों में जुटे थे, शहर में होर्डिंग्स लग चुके थे और ऑनलाइन बैठकों के जरिए रणनीति बनाई जा रही थी, तो वहीं दूसरी तरफ पार्टी के ही एक धड़े ने इस सक्रियता पर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी। विरोध करने वाले नेताओं ने हालिया आगजनी की घटनाओं का हवाला देते हुए आयोजन को संवेदनशील बताया और इसकी शिकायत सीधे प्रदेश नेतृत्व से कर दी। इस अंदरूनी खींचतान का नतीजा यह हुआ कि संगठन को बीच-बचाव करना पड़ा और अंततः हाईकमान के हस्तक्षेप के बाद इस भव्य रैली को पूरी तरह निरस्त कर दिया गया। इस फैसले ने न केवल कार्यकर्ताओं के उत्साह पर पानी फेर दिया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि इंदौर भाजपा में सब कुछ ठीक नहीं है। हालांकि, इस विवाद के बीच संगठन अब डैमेज कंट्रोल की तैयारी में है। चर्चा है कि श्याम टेलर की नई टीम का खाका तैयार हो चुका है और जल्द ही इसकी आधिकारिक घोषणा की जा सकती है, जिसमें इंदौर के कुछ चेहरों को जगह देकर असंतोष को शांत करने की कोशिश की जाएगी। फिलहाल, रैली रद्द होने के इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर अनुशासन और गुटबाजी के बीच की बारीक रेखा को एक बार फिर बहस के केंद्र में ला दिया है।

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