इंदौर।
जिले के भागीरथपुरा में दूषित पानी ने जिस तरह 9 जिंदगियां लील ली हैं, उसने पूरी राजधानी को खौफ में डाल दिया है। इंदौर की इस खौफनाक त्रासदी के बाद अब भोपाल नगर निगम की नींद टूटी है। शहर में 'खूनी पानी' की आहट ने प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए हैं, जिसके बाद महापौर मालती राय ने आनन-फानन में पूरी इंजीनियरिंग फौज को सड़कों पर उतार दिया है।
मौत बांट रही हैं जर्जर पाइपलाइनें?
महापौर ने दो टूक शब्दों में सब-इंजीनियरों और सुपरवाइजरों को जमीन पर उतरकर पाइपलाइनों का पोस्टमार्टम करने को कहा है। डर इस बात का है कि शहर के कई हिस्सों में बिछी पुरानी और जर्जर पाइपलाइनें कहीं सीवेज के गंदे नाले से तो नहीं मिल गईं? अगर ऐसा हुआ, तो भोपाल के घरों में भी मौत का सप्लाई होना तय है। अधीक्षण और कार्यपालन यंत्रियों को पल-पल की रिपोर्ट देने के सख्त आदेश दिए गए हैं।
अवधपुरी में जांच, लिए गए सैंपल
बुधवार को नगर निगम की टीम अवधपुरी के उन इलाकों में पहुंची, जहां कुछ समय पहले पीएनजी पाइपलाइन फटने से हड़कंप मचा था। टीम ने वहां के घरों से पानी के सैंपल भरे हैं। सीवेज की रोज आती सैकड़ों शिकायतों ने इस शक को गहरा कर दिया है कि कहीं हम जो पानी पी रहे हैं, उसमें सीवेज का जहर तो नहीं घुला है?
भोपाल ने पहले भी देखा है मौत का मंजर
राजधानी के लोग आज भी ईदगाह हिल्स का वो मंजर नहीं भूले हैं, जब क्लोरीन गैस के रिसाव ने लोगों का दम घोंटना शुरू कर दिया था। उस वक्त 10 से ज्यादा लोग अस्पताल पहुंच गए थे। इंदौर की ताजा मौतों ने उसी पुराने जख्म को हरा कर दिया है। सवाल यह है कि क्या नगर निगम इंदौर जैसी बलि होने का इंतजार कर रहा था? अब देखना यह है कि जांच में क्या सच निकलकर सामने आता है।