इंदौर। 
इंदौर को देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा मिला हुआ है। इसके उलट भागीरथपुरा की गलियों में सबसे ज्यादा गंदगी है। यहां नालियों से नहीं, नलों से बीमारी बह रही है। दूषित पानी से आठ लोग मर चुके हैं। 149 लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। सड़कों पर स्वच्छता है, लेकिन पीने का पानी शौचालय से होकर गुजर रहा है। लोग बदबूदार पानी पीते रहे। उल्टी-दस्त शुरू हो गए। नगर निगम की नींद तब खुली, जब लाशों के नंबर बढ़ने लगे। अगस्त में नई पानी की लाइन का टेंडर जारी हो चुका था। चार एजेंसियां कतार में थीं। शिकायतें लिखित थीं, लेकिन फाइल नहीं खुली। फाइलें तब खुलीं, जब चिताएं जलने लगीं। अब अचानक टेंडर भी खुल गया, जांच भी बैठ गई और कुछ अफसर सस्पेंड भी हो गए। हैरानी तो ये रही कि जब भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत हो रही थी, तो नेता आयोजनों में व्यस्त थे। दूषित पानी का मामला सामने आने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की आयोजनों में शामिल होने की तस्वीरें सामने आईं। इलाके के पार्षद कमल वाघेला का झूला झूलते वीडियो आया, वहीं जलकार्य विभाग के प्रभारी बबलू शर्मा का एक आयोजन में खाना परोसते फोटो सामने आई। ये तस्वीरें सोशल मीडिया पर अब चर्चा में हैं।
अब सभी कर रहे जांच और मरम्मत की बातें
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि जिस लाइन का टेंडर सातवें महीने में स्वीकृत हुआ था, उसमें देरी क्यों हुई इसकी जांच होगी। कमल वाघेला ने बताया कि डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के टेंडर सोमवार को खुल चुके हैं और मेन लाइन बदलने का वर्कऑर्डर हो चुका है। अपर आयुक्त रोहित सिसोनिया ने कहा कि वार्ड में प्रस्तावित कार्यों में मैन लाइन और डिस्ट्रीब्यूशन लाइन के कार्य दो महीने में पूरा हो जाएंगे। नगर निगम आयुक्त दिलीप यादव ने कहा कि मरम्मत का काम शुरू हो गया है। मरम्मत के बाद फ्लशिंग, क्लोरीनेशन और सैंपल टेस्टिंग की जाएगी। जनता के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं होगा।