इंदौर। 
मध्य प्रदेश के इंदौर में दूषित पानी के मामले में प्रशासन एक्टिव मोड में है. भागीरथपुरा में दूषित पानी से 3 लोगों की मौत के बाद राज्य सरकार ने जहां मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की है. वहीं प्रथम दृष्टि या दोषी बताए जा रहे 2 अधिकारियों को सस्पेंड करने के साथ एक इंजीनियर की सेवा समाप्त कर दी गई है. राज्य शासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की जानलेवा लापरवाही के लिए किसी को भी बक्शा नहीं जाएगा. हालांकि खबर है कि मामले में अनाधिकृत तौर पर 8 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन इसकी प्रशासनिक पुष्टि नहीं हुई. वहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है.
दूषित पानी मामले में 70 अभी भी अस्पताल में
भागीरथपुरा में गुरुवार से ही गंदे पानी की सप्लाई के कारण एक के बाद एक करके करीब 150 लोग बीमार हो गए. इनमें से 70 अभी भी अस्पताल में भर्ती हैं. जबकि तीन अलग-अलग मामलों में यहां भागीरथ पुरा निवासी उर्मिलादेवी, नन्दलाल पाल और मंजुलता नामक महिला की मौत हो गई. इस घटना से मचे कोहराम के बाद सुबह से ही नगर निगम की टीम गंदे पानी का स्रोत पता लगाने में जुटी थी. वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पूरे मामले में संज्ञान लेते हुए सभी मरीजों के निशुल्क इलाज के निर्देश दिए थे.
3 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई
मंगलवार शाम होते-होते इस मामले में राज्य सरकार ने 3 अधिकारियों को लापरवाही का जिम्मेदार मानते हुए उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की. जिनमें इंदौर नगर निगम के जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले और सहायक यंत्री योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. इनके अलावा प्रभारी उपयंत्री पीएचई शुभम श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक किया गया है. वहीं मामले की जांच के लिए जांच समिति भी गठित की गई है.
जांच के लिए 3 सदस्यों की टीम गठित
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि "भागीरथपुरा क्षेत्र में हुई घटना बेहद दुखद है. सीएम ने मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए पीड़ितों के तुरंत ठीक होने की कामना की." इस संबंध में कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि "भागीरथपुरा मामलें में जोनल अधिकारी शालिग्राम सितोले, सहायक यंत्री योगेश जोशी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है. इसके अलावा प्रभारी उपयंत्री पीएचई शुभम श्रीवास्तव को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक किया गया है.