अब तक क्यों नहीं हटाया इंदौर BRTS? अफसरों की हीलाहवाली पर हाई कोर्ट सख्त
इंदौर।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट इंदौर बीआरटीएस (BRTS) को हटाने को लेकर सख्त है. अधिकारियों द्वारा एसआईआर में व्यस्त होने के साथ ही उपस्थित नहीं होने की गुहार लगाई गई. लेकिन कोर्ट की सख्ती के कारण अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुए. सुनवाई के बाद अब कोर्ट ने 12 जनवरी को बीआरटीएस हटाने की प्रोग्रेस रिपोर्ट लेकर आने के निर्देश दिए हैं.
इंदौर कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त पेश हुए
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में बुधवार को बीआरटीएस हटाने को लेकर सुनवाई हुई. इस दौरान इंदौर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों ने एसआईआर में व्यस्त होने के चलते कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं होने की गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने कहा "उन्हें ढाई बजे तक कोर्ट के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा." इसके बाद इंदौर कलेक्टर सहित इंदौर नगर निगम और डीसीपी ट्रैफिक कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए.
बीआरटीएस हटाने में 2 से 3 माह लगेंगे
हाई कोर्ट ने इस दौरान पूछा "आदेश के बाद भी बीआरटीएस क्यों नहीं हटाया गया." इसको लेकर अधिकारियों ने जवाब दिया "ट्रैफिक को देखते हुए बीआरटीएस को हटाया जा रहा है और कई जगह पूरी तरीके से बीआरटीएस हटा भी दिया गया है, लेकिन अभी भी 2 से 3 महीने बीआरटीएस को हटाने में लगेंगे." इस पर कोर्ट ने कहा "भोपाल में तो बीआरटीएस कुछ ही दिनों में हटा दिया गया. इंदौर में इतना समय क्यों लग रहा है."
सड़क चौड़ीकरण और डिवाइडर पर भी सवाल
कोर्ट ने ट्रैफिक के साथ ही सड़क के चौड़ीकरण और डिवाइडर को लेकर भी अधिकारियों से सवाल जवाब किए. याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अजय बगड़िया ने बताया "अब इस मामले की 12 जनवरी को सुनवाई होगी." वहीं, अधिवक्ता अजय बगड़िया ने कोर्ट के समक्ष अपनी बात रखी.

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